कक्षा 10 गणित अध्याय 1 वास्तविक संख्याएँ – नोट्स, प्रश्न उत्तर व MCQ टेस्ट
कक्षा 10 गणित अध्याय 1 वास्तविक संख्याएँ – नोट्स, प्रश्न उत्तर व MCQ टेस्ट
Class 10 Maths Chapter 1 Real Numbers Notes, Questions With Answers & 50 MCQ Test (CBSE / Bihar Board)
📌 पाठ परिचय (Introduction)
वास्तविक संख्याएँ वे सभी संख्याएँ हैं जिनका उपयोग हम रोज़मर्रा के जीवन में करते हैं।जैसे 1, 2, 3 आदि प्राकृतिक संख्याएँ हैं, और … -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3 … पूर्णांक कहलाती हैं।
भिन्न संख्याएँ जैसे 1/2, 3/4, -5/7 आदि परिमेय संख्याएँ होती हैं, जबकि √2, √3, π जैसी संख्याएँ अपरिमेय संख्याएँ हैं।
इन सभी संख्याओं को संख्या रेखा पर दिखाया जा सकता है, इसलिए इन्हें मिलाकर वास्तविक संख्याएँ कहा जाता है।
हम इस अध्याय में क्या सीखेंगे?
1. यूक्लिड विभाजन प्रमेय (Euclid’s Division Lemma) से HCF निकालना।
2. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic) और उससे HCF, LCM निकालना।
3. सिद्ध करना कि √2, √3, √5 आदि क्यों अपरिमेय हैं।
4. परिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार: कब सांत (Terminating) और कब असांत (Non-terminating, Repeating)।
1. संख्या पद्धति का पुनरावलोकन (Number System Review)
संख्याओं को उनके गुणों के आधार पर अलग-अलग समूहों में बाँटा गया है। आइए इन्हें सरल भाषा में देखते हैं।
1. प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers - N)
वे संख्याएँ जिनका उपयोग हम गिनती करने में करते हैं।उदाहरण: 1, 2, 3, 4, 5…
सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या: 1
2. पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers - W)
यदि प्राकृतिक संख्याओं में 0 (शून्य) को भी जोड़ दिया जाए, तो हमें पूर्ण संख्याएँ मिलती हैं।उदाहरण: 0, 1, 2, 3, 4, 5…
सबसे छोटी पूर्ण संख्या: 0
3. पूर्णांक (Integers - Z)
सभी पूर्ण संख्याएँ और उनकी ऋणात्मक (Negative) संख्याएँ मिलकर पूर्णांक बनाती हैं।समूह: … -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3 …
नोट: 0 न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक।
4. परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ (Rational and Irrational)
परिमेय संख्या (Rational Number): जिसे p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों और q ≠ 0 हो।उदाहरण: 2/3, -5/7, 4, 0, 3.5 आदि।
अपरिमेय संख्या (Irrational Number): जिसे p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
उदाहरण: √2, √3, √5, π, 0.101001000… आदि।
परिमेय और अपरिमेय दोनों मिलकर वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) बनाते हैं।
2. परिमेय और अपरिमेय संख्याओं में अंतर
| परिमेय संख्या (Rational) | अपरिमेय संख्या (Irrational) |
|---|---|
| जिसे p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p, q पूर्णांक हों और q ≠ 0 हो। | जिसे p/q के रूप में नहीं लिखा जा सके। |
| दशमलव प्रसार सांत (Terminating) या असांत आवर्ती (Non-terminating, Repeating) होता है। | दशमलव प्रसार असांत अनावर्ती (Non-terminating, Non-repeating) होता है। |
| उदाहरण: 1/2, 3/4, -5/2, 4, 0, 2.75 | उदाहरण: √2, √3, π, 0.101001000… |
3. वास्तविक संख्याएँ – यूक्लिड विभाजन प्रमेय, HCF-LCM, √2 की अपरिमेयता और दशमलव प्रसार
आइए यूक्लिड विभाजन प्रमेय, HCF एवं LCM निकालने की विधि, √2 की अपरिमेयता सिद्ध करने का तरीका तथा दशमलव प्रसार को सरल भाषा में समझते हैं।
1. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका से HCF निकालना (Euclid’s Division Lemma)
सिद्धांत: यह लंबी भाग विधि (Long Division) का ही एक रूप है। हम तब तक भाग देते रहते हैं जब तक शेषफल (Remainder) 0 न आ जाए।
दो संख्याओं का HCF वही होता है जो 'अंतिम भाजक' (Last Divisor) होता है, जिससे शेषफल 0 आता है। सूत्र: a = bq + r
उदाहरण: 135 और 225 का HCF
चरण 1: बड़ी संख्या को a और छोटी को b मानें। (a = 225, b = 135)225 में 135 का भाग दें:
225 = 135 × 1 + 90 (शेषफल 90 है)
चरण 2: अब पिछला भाजक (135) 'a' बन जाएगा और शेषफल (90) 'b' बन जाएगा।
135 = 90 × 1 + 45 (शेषफल 45 है)
चरण 3: प्रक्रिया दोहराएँ। अब 90 और 45 को लें।
90 = 45 × 2 + 0 (शेषफल 0 आ गया!)
2. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय – HCF और LCM
सिद्धांत: हर संख्या को उसके 'अभाज्य गुणनखंडों' (Prime Factors) में तोड़ा जा सकता है। इसी की मदद से हम HCF और LCM निकालते हैं।
🔸 HCF = उभयनिष्ठ (Common) गुणनखंड की सबसे छोटी घात।
🔸 LCM = सभी गुणनखंडों की सबसे बड़ी घात।
उदाहरण: 6 और 20 का HCF और LCM
चरण 1: अभाज्य गुणनखंड करें6 = 2¹ × 3¹
20 = 2 × 2 × 5 = 2² × 5¹
चरण 2: HCF निकालना
दोनों में कॉमन संख्या '2' है।
2 की छोटी घात क्या है? (2¹ या 2²?) → उत्तर: 2¹
HCF = 2
चरण 3: LCM निकालना
सभी संख्याएं (2, 3, 5) लें और उनकी बड़ी घात देखें।
2² × 3¹ × 5¹ = 4 × 3 × 5 = 60
LCM = 60
3. सिद्ध करें कि √2 एक अपरिमेय संख्या है
सिद्धांत: इसे "विरोधाभास विधि" (Method of Contradiction) कहते हैं। हम पहले मानते हैं कि यह परिमेय है, और अंत में साबित करते हैं कि हमारी सोच गलत थी।
हम दिखाएंगे कि अंश (numerator) और हर (denominator) में 1 के अलावा भी कोई कॉमन नंबर (जैसे 2) आ रहा है, जो कि परिमेय संख्या के नियम के खिलाफ है।
तो, √2 = a/b (जहाँ a और b सह-अभाज्य हैं, b ≠ 0)
चरण 2: दोनों तरफ वर्ग (Square) करने पर
2 = a²/b² ⇒ 2b² = a²
इसका मतलब: 2, a² को विभाजित करता है। अतः 2, a को भी विभाजित करेगा। ...(कथन 1)
चरण 3: प्रतिस्थापन
माना a = 2c (जहाँ c कोई पूर्णांक है)
मान रखने पर: 2b² = (2c)²
2b² = 4c² ⇒ b² = 2c²
इसका मतलब: 2, b² को विभाजित करता है। अतः 2, b को भी विभाजित करेगा। ...(कथन 2)
निष्कर्ष:
कथन 1 और 2 से पता चलता है कि a और b दोनों 2 से कटते हैं। यह हमारी शुरुआत की बात (कि वे सह-अभाज्य हैं) का विरोध करता है।
4. दशमलव प्रसार – सांत और असांत दशमलव
सिद्धांत: बिना भाग दिए चेक करने का जादुई तरीका। केवल हर (Denominator) को देखो।
हमारी गिनती 10 के आधार (Decimal System) पर है। 10 केवल 2 और 5 से बनता है (2 × 5 = 10)। अगर हर में 2 और 5 के अलावा कोई घुसपैठिया (जैसे 3, 7) आ जाए, तो भाग कभी खत्म नहीं होगा।
जाँचने के नियम:
हर (q) के गुणनखंड करें:- ✅ सांत (Terminating): यदि गुणनखंड केवल 2 हैं, केवल 5 हैं, या दोनों (2 और 5) हैं। (रूप: 2ⁿ × 5ᵐ)
- ❌ असांत आवर्ती (Non-terminating): यदि 2 और 5 के साथ कोई और संख्या (3, 7, 11...) आ जाए।
1) 7/80: हर 80 = 2⁴ × 5¹ (सिर्फ 2 और 5 हैं) → सांत
2) 10/21: हर 21 = 3 × 7 (इसमें 2, 5 नहीं हैं, 3, 7 हैं) → असांत आवर्ती
📝 परीक्षा सारांश (Exam Summary)
- 🔍 3 अंक पक्के (Most Important): "सिद्ध करें कि √2, √3 या √5 एक अपरिमेय संख्या है।" यह प्रश्न बोर्ड परीक्षा में लगभग हर साल आता है। इसका स्टेप-बाय-स्टेप हल रट लें।
- 🔢 शांत/अशांत पहचानना: बिना भाग दिए दशमलव प्रसार बताने के लिए, हर (Denominator) के गुणनखंड देखें। यदि केवल 2ⁿ × 5ᵐ है, तो 'शांत' (Terminating) है। यदि इसके अलावा कोई और संख्या (जैसे 3, 7) है, तो 'अशांत आवर्ती' है।
- ⚠️ LCM × HCF नियम: सूत्र HCF × LCM = a × b केवल दो संख्याओं के लिए ही सही है। तीन संख्याओं (a, b, c) के लिए यह नियम काम नहीं करता।
- 💡 MCQ टिप: सबसे छोटी भाज्य संख्या 4 है और सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 है। इनका गुणनफल 8, HCF 2 और LCM 4 होता है। यह अक्सर 1 नंबर में पूछा जाता है।
(नीचे दिए गए प्रश्नों को हल करें और अपनी तैयारी जाँचें)
96 = 2 × 48 = 2² × 24 = 2³ × 12 = 2⁴ × 6 = 2⁵ × 3
अर्थात 96 = 2⁵ × 3
404 = 4 × 101 = 2² × 101
HCF के लिए समान अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात लेते हैं।
यहाँ केवल 2 समान है, और उसकी सबसे छोटी घात 2² है।
अतः HCF = 2² = 4
चरण 1. मान लेते हैं कि 5 - √3 एक परिमेय संख्या r है।
5 - √3 = r
चरण 2. अब √3 को अकेला करें:
√3 = 5 - r
चरण 3. यहाँ 5 और r दोनों परिमेय हैं, इसलिए 5 - r भी परिमेय होगा।
इसका अर्थ है √3 परिमेय है, जो कि गलत है क्योंकि √3 अपरिमेय संख्या है।
इसलिए हमारा मानना गलत था। अतः 5 - √3 अपरिमेय संख्या है।
चरण 1. किसी भी संख्या के 0 पर समाप्त होने के लिए उसके गुणनखंड में 2 और 5 दोनों का होना ज़रूरी होता है (ताकि 10 बने)।
चरण 2. 6ⁿ = (2 × 3)ⁿ है, अतः इसके अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और 3 हैं, इसमें 5 नहीं है।
चरण 3. क्योंकि 5 नहीं है, इसलिए 2 × 5 = 10 बन ही नहीं सकता।
अतः 6ⁿ कभी भी 0 पर समाप्त नहीं हो सकती।
चरण 1. 0.375 का दशमलव प्रसार रुक जाता है, इसलिए यह सांत दशमलव है।
चरण 2. सांत दशमलव हमेशा परिमेय संख्या होती है।
0.375 = 375/1000
375/1000 = 3/8 (3 और 8 से सरल करके)
अतः 0.375 परिमेय संख्या है और इसे 3/8 के रूप में लिखा जा सकता है।
हर (q) = 40
40 = 4 × 10 = 2² × (2 × 5) = 2³ × 5
यहाँ q के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और 5 हैं।
अतः 13/40 का दशमलव प्रसार सांत (Terminating) होगा।
हम जानते हैं:
HCF × LCM = पहली संख्या × दूसरी संख्या
6 × LCM = 24 × 90
6 × LCM = 2160
LCM = 2160 / 6 = 360
अतः LCM = 360
100 = 10² = (2 × 5)² = 2² × 5²
दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखंड: 2² × 3 × 5²
इसमें 2² और 5² दोनों मौजूद हैं, इसलिए यह 100 से विभाज्य होगी।
अतः उत्तर: हाँ, यह संख्या 100 से विभाज्य होगी।
हर (q) = 15
15 = 3 × 5
q के अभाज्य गुणनखंडों में 3 और 5 हैं, यानी 2 और 5 के अलावा 3 भी है।
नियम के अनुसार यदि हर के अभाज्य गुणनखंडों में 2 और 5 के अलावा कोई अन्य संख्या हो तो दशमलव प्रसार असांत आवर्ती (Non-terminating, Repeating) होता है।
अतः 7/15 का दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होगा।
किसी संख्या के अंत में जितने 0 होते हैं, उतने ही 10 उसके गुणनखंड में होते हैं।
और 10 = 2 × 5 होता है।
दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखंड: 2³ × 3 × 5² × 7
2 की घात 3 है, 5 की घात 2 है।
10 बनने के लिए एक 2 और एक 5 चाहिए, इस प्रकार 10 की अधिकतम संख्या जो बन सकती है वह 2 (कम घात) होगी।
अतः इस संख्या के अंत में 2 शून्य (0) होंगे।
हाँ, यदि कोई परिमेय संख्या p/q (सरलतम रूप में) का दशमलव प्रसार सांत (Terminating) है, तो q के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और 5 ही होते हैं।
कारण:
सांत दशमलव को हम 10, 100, 1000… जैसी संख्या के हर के साथ भिन्न में बदल सकते हैं, और 10, 100, 1000… सभी 2 और 5 के ही गुणनफल हैं, जैसे 10 = 2 × 5, 100 = 2² × 5² आदि।
इसलिए सरल रूप में हर (q) = 2ⁿ × 5ᵐ के रूप में ही होगा।
अतः कथन सही है।
📊 Test Result
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