कक्षा 10
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इतिहास अध्याय–6 : शहरीकरण एवं शहरी जीवन | Class 10 History Notes (CBSE & Bihar Board)

शहरीकरण एवं शहरी जीवन

शहरीकरण

शहरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें गाँव या कस्बे धीरे-धीरे शहरों के रूप में विकसित होते हैं। यह प्रक्रिया सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवर्तनों से जुड़ी है।

गाँव और शहर में अंतर

  • गाँवों की तुलना में शहरों में जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक होता है, क्योंकि लोग रोजगार और सुविधाओं के कारण शहरों में अधिक संख्या में बसते हैं।
  • गाँवों में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित होती है, जबकि शहरों में व्यापार, उद्योग, नौकरी और विभिन्न सेवाएँ आजीविका के प्रमुख साधन होते हैं।
  • गाँवों में प्राकृतिक वातावरण स्वच्छ और शांत रहता है, लेकिन शहरों में वाहनों, उद्योगों और अधिक जनसंख्या के कारण प्रदूषण की समस्या अधिक दिखाई देती है।
  • शहरों में शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, संचार और मनोरंजन जैसी सुविधाएँ अधिक विकसित और आधुनिक होती हैं, जबकि गाँवों में ये सुविधाएँ सीमित होती हैं।

शहरीकरण के ऐतिहासिक कारण

  • औद्योगिक पूँजीवाद के उदय के साथ मशीनों और कारखानों की स्थापना हुई, जिससे शहर आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन गए और लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर आकर्षित होने लगे।
  • औपनिवेशिक शासन के दौरान यूरोपीय देशों ने व्यापार और प्रशासन को नियंत्रित करने के लिए बंदरगाहों और व्यापारिक शहरों का विकास किया, जिसके परिणामस्वरूप शहरीकरण तेज हुआ।
  • लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रसार के कारण शहरों में शिक्षा, राजनीतिक जागरूकता और नागरिक अधिकारों की समझ बढ़ी, जिससे समाज में नए परिवर्तन आए और शहर आधुनिक जीवन के केंद्र बन गए।

मध्यकालीन शहरीकरण

  • मध्यकाल के दौरान भारत में शहर मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों और व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हुए, जहाँ तीर्थयात्रा और बाज़ार दोनों ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
  • इस काल में कई किलेबंद शहरों का निर्माण किया गया, जिनमें शासक वर्ग, व्यापारी, सैनिक और दस्तकार सुरक्षित रूप से निवास करते थे और शहर प्रशासन तथा आर्थिक गतिविधियों के संगठित केंद्र बनकर उभरते थे।
  • 18वीं शताब्दी तक भारत के अधिकांश शहरों का स्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों जैसा ही था, जहाँ शहरों की संरचना और जीवनशैली में ग्रामीणता की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी।

औद्योगिक क्रांति और शहरीकरण

  • औद्योगिक क्रांति के दौरान इंग्लैंड में लीड्स और मैनचेस्टर जैसे शहर तेजी से विकसित हुए और कपड़ा उद्योग के प्रमुख केंद्र बन गए, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में इन शहरों की ओर आकर्षित हुए।
  • लंदन इस समय विश्व का सबसे बड़ा औद्योगिक और वाणिज्यिक शहर बन गया, जहाँ लाखों प्रवासी मजदूर काम करने आए और उद्योगों तथा व्यापारिक गतिविधियों में शामिल हुए।
  • 1851 तक मैनचेस्टर की लगभग 75% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रवासी मजदूरों की थी, जिससे स्पष्ट होता है कि औद्योगीकरण ने ग्रामीण जनसंख्या को बड़े पैमाने पर शहरों की ओर स्थानांतरित किया और शहरीकरण को तेजी दी।

शहरी जीवन की चुनौतियाँ

  • औद्योगीकरण के कारण बड़ी संख्या में लोग शहरों में आए, लेकिन पर्याप्त घर उपलब्ध न होने के चलते मजदूरों को झुग्गी–झोपड़ियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा और आवास की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई।
  • शहरों में अत्यधिक भीड़, गंदगी और स्वच्छता की कमी के कारण विभिन्न बीमारियाँ फैलने लगीं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ गईं।
  • गरीबी, बेरोजगारी और असमानता के कारण शहरों में अपराध, हिंसा और सामाजिक असंतोष बढ़ा, जिससे शहरी जीवन असुरक्षित और तनावपूर्ण बन गया।
  • जनसंख्या बढ़ने के साथ परिवहन की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ी, इसलिए लंदन में 1863 में भूमिगत रेल (सबवे) की शुरुआत की गई, जिसने शहर के विस्तार और यातायात प्रणाली में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शहरी सुधार

  • गार्डन सिटी (बगीचों का शहर) की कल्पना एबेनेज़र हावर्ड ने की। उन्होंने ऐसे योजनाबद्ध शहरों की अवधारणा प्रस्तुत की जिनमें घर, बाजार और उद्योग के साथ हरित क्षेत्र और खुली जगहें भी हों, ताकि शहर सुंदर, स्वस्थ और संतुलित तरीके से विकसित हो सके।
  • 20वीं शताब्दी में ब्रिटिश सरकार ने मजदूरों के आवास संबंधी समस्या को ध्यान में रखते हुए सस्ते और नियमित आवासों के निर्माण की योजनाएँ शुरू कीं, जिससे झुग्गी–झोपड़ियों में रहने की मजबूरी धीरे-धीरे कम हुई।
  • समय के साथ सार्वजनिक परिवहन में सुधार किया गया और बस, ट्राम तथा मेट्रो जैसी व्यवस्थाओं ने शहरों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे लोगों के आवागमन में सुविधा बढ़ी और शहरी विकास को गति मिली।

महत्वपूर्ण शब्द (Key Terms)

  • टेनमेंट्स: मजदूरों के लिए बने सस्ते मकान, जिनमें भीड़ अधिक होती थी और सुविधाएँ सीमित होती थीं।
  • गार्डन सिटी: हरित क्षेत्रों और योजनाबद्ध ढाँचे वाला शहर, जिसमें रहने और काम करने के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण भी शामिल होता है।
  • भूमिगत रेल: लंदन की मेट्रो रेल सुविधा, जिसने शहरी परिवहन प्रणाली में बड़ा परिवर्तन लाया और यात्राओं को तेज और आसान बनाया।

सामाजिक बदलाव और शहरी जीवन

औद्योगीकरण और शहरीकरण ने समाज में नए बदलाव लाए। शहरों में रहने की प्रवृत्ति बढ़ी, जिससे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तनों का दौर शुरू हुआ।

शहरीकरण और आधुनिकता

  • शहरों को आधुनिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।
  • व्यक्तिवाद की भावना बढ़ी और पारंपरिक संबंधों में ढील आई।
  • सह-अस्तित्व के बावजूद पृथक्करण और घेटोकरण (विशेष समूहों का अलगाव) बढ़ा।

नए सामाजिक समूहों का उदय

  • शहरीकरण से विभिन्न वर्गों के लोग शहरों की ओर आकर्षित हुए।
  • पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी व्यक्तिवाद की भावना बढ़ी।
  • महिलाओं के अधिकारों को लेकर आंदोलन हुए, जिससे उनकी स्थिति में सुधार आया।

आर्थिक बदलाव और वर्ग संघर्ष

  • पूंजीपति वर्ग ने अपने प्रभाव को बढ़ाया और औद्योगिक क्रांति के लाभ उठाए।
  • मध्यम वर्ग (शिक्षक, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, क्लर्क) उभरकर आया।
  • श्रमिक वर्ग को न्यूनतम वेतन और अधिक श्रम करना पड़ा, जिससे उनका शोषण हुआ।

श्रमिक आंदोलन और सुधार

  • काम के घंटे कम करने और वेतन बढ़ाने के लिए श्रमिकों ने संघर्ष किया।
  • 1825 में इंग्लैंड में मजदूरों के संगठन बनाने की अनुमति मिली।
  • ट्रेड यूनियन की स्थापना हुई, जिससे श्रमिक अधिकारों की रक्षा संभव हुई।

औपनिवेशिक भारतीय शहर

औपनिवेशिक भारत में शहरीकरण की प्रक्रिया धीमी और असंगठित थी। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में केवल 11% भारतीय शहरों में रहते थे। उस समय के प्रमुख शहरों में बंबई, मद्रास और कलकत्ता थे, जिन्हें प्रेसीडेंसी शहर कहा जाता था। ये शहर व्यापार, प्रशासन और सेना के मुख्य केंद्र थे।

बंबई का विकास और विस्तार

  • बंबई प्रारंभ में सात टापुओं का समूह था, जिसे आबादी बढ़ने के साथ जोड़ा गया।
  • यह औपनिवेशिक भारत की वाणिज्यिक राजधानी बना और यहाँ से कपास और अफीम का निर्यात होता था।
  • 1854 में पहली कपड़ा मिल खुली और 1921 तक 85 मिलों में 1,46,000 मजदूर कार्यरत थे।
  • 1931 तक बंबई में रहने वाले अधिकांश लोग बाहरी राज्यों से आए हुए प्रवासी थे।

घनी आबादी और आवासीय समस्या

  • बंबई में प्रति व्यक्ति केवल 9.5 वर्ग गज जमीन उपलब्ध थी, जबकि लंदन में यह 155 वर्ग गज थी।
  • शहर का केंद्र फोर्ट एरिया था, जो नस्ली आधार पर बंटा था—नेटिव भारतीयों और यूरोपीय निवासियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र थे।
  • 70% आबादी 'चॉल' में रहती थी, जो संकरी और भीड़भाड़ वाली बहुमंजिला इमारतें थीं।
  • चॉलों में अलग शौचालय की सुविधा नहीं थी, जिससे स्वच्छता की गंभीर समस्या बनी रही।

नगर योजना और सुधार प्रयास

  • लंदन में नगर योजना सामाजिक क्रांति के डर से लागू की गई, जबकि बंबई में प्लेग महामारी के कारण सुधार कार्य शुरू हुए।
  • 1898 में सिटी ऑफ बॉम्बे इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की स्थापना हुई, जिसने शहर के पुनर्विकास की पहल की।
  • 1918 में मकान किराया नियंत्रण कानून पारित किया गया, लेकिन इससे आवास समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हुआ।

भूमि सुधार और विस्तार योजनाएँ

  • बंबई में जमीन की कमी थी, जिसे दूर करने के लिए भूमि विकास परियोजनाएँ चलाई गईं।
  • 1784 में गवर्नर विलियम हॉर्नवी ने एक तटीय दीवार बनाने की योजना बनाई ताकि समुद्र के पानी से निचले इलाके सुरक्षित रह सकें।
  • 1864 में बैक बे रिक्लेमेशन कंपनी को समुद्री तट विकसित करने का ठेका मिला।
  • 1914-1918 के बीच बालार्ड एस्टेट और मरीन ड्राइव जैसी परियोजनाएँ शुरू हुईं, जिससे शहर के बुनियादी ढाँचे में सुधार हुआ।

पटना (प्राचीन पाटलीपुत्र) : इतिहास और विकास

पटना, जिसे प्राचीन काल में पाटलीपुत्र के नाम से जाना जाता था, भारत के सबसे पुराने और ऐतिहासिक नगरों में से एक है। यह शहर प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

पाटलीपुत्र की स्थापना और प्राचीन गौरव

  • पाटलीपुत्र की स्थापना छठी शताब्दी ई.पू. में मगध के शासक अजातशत्रु द्वारा एक सैनिक शिविर के रूप में की गई।
  • यह बाद में मगध साम्राज्य की राजधानी बना और मौर्य साम्राज्य के समय इसका सर्वाधिक विकास हुआ।
  • मौर्यकाल में यह नगर कंधार से कर्नाटक तक फैले विशाल साम्राज्य की राजधानी था।
  • दक्षिण पटना के कुम्हरार से मौर्यकालीन राज-प्रसाद के अवशेष मिले हैं।
  • मेगास्थनीज़ की रचना ‘इंडिका’ में इस नगर के प्रशासन और जनजीवन का विस्तृत वर्णन मिलता है।
  • प्राचीन समय में इसकी आबादी लगभग 4 लाख थी।

गुप्त और मध्यकालीन युग में स्थिति

  • गुप्त काल में भी पाटलीपुत्र का गौरव बना रहा, और चीनी यात्री फा-हियान ने इसके वैभव का उल्लेख किया।
  • मध्यकाल में यह नगर पतन की ओर बढ़ा, लेकिन शेरशाह सूरी ने 1541 ई. में इसका पुनर्निर्माण किया और यहाँ एक दुर्ग का निर्माण करवाया।
  • अकबर के शासनकाल तक यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन चुका था।
  • 1856 ई. में अंग्रेज यात्री राल्फ फिच ने पटना के व्यापार का उल्लेख किया, जिसमें कपास, सूती वस्त्र, चीनी, अफीम, शोरा और नील का निर्यात होता था।
  • यहाँ पंजाब के खत्री, पश्चिमी भारत के जैन व्यापारी, ईरानी, मध्य एशियाई एवं आर्मीनियाई व्यापारी सक्रिय थे।

मुगलकाल और अजीमाबाद का विकास

  • 17वीं-18वीं शताब्दी में पटना की आबादी 3 लाख से अधिक थी, जब यूरोप के अधिकांश नगरों की आबादी 1 लाख से भी कम थी।
  • यहाँ मुगलकालीन भव्य इमारतों का निर्माण हुआ, जिनमें से कई अब भी पटना में देखी जा सकती हैं।
  • 1666 ई. में सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म पटना में हुआ, जिससे यह धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया।
  • 18वीं शताब्दी के आरंभ में मुगल राजकुमार अजीमुशान ने इस नगर का नव निर्माण कराया और इसे ‘अजीमाबाद’ नाम दिया।
  • नगर के पुनर्निर्माण पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च हुए, जिससे यह भारत के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों में अग्रणी बन गया।

ब्रिटिश काल और आधुनिक पटना

  • 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश शासन के साथ आधुनिक पटना के विकास की प्रक्रिया शुरू हुई।
  • अंग्रेजों ने इसे प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया।
  • धीरे-धीरे यह शिक्षा, व्यापार और राजनीति का प्रमुख केंद्र बन गया।

सिंगापुर शहर का विकास

सिंगापुर, जो कभी एक साधारण बंदरगाह नगर था, आज विश्व के सबसे उन्नत और सुनियोजित शहरों में गिना जाता है। इसके विकास का श्रेय ली कुआन यू को जाता है, जिनके नेतृत्व में सिंगापुर को 1965 में स्वतंत्रता मिली और इसके बाद यह एक आधुनिक नगर के रूप में उभरा।

स्वतंत्रता से पहले सिंगापुर की स्थिति

  • 1965 तक सिंगापुर एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर था लेकिन इसकी स्थिति अन्य एशियाई शहरों जैसी ही थी।
  • यह नगर मुख्य रूप से श्वेत उपनिवेशियों द्वारा बसाया गया था, और स्थानीय आबादी भीड़भाड़ व गंदगी में रहने को मजबूर थी।
  • शहर का बुनियादी ढांचा अव्यवस्थित था और सामाजिक असमानता व्याप्त थी।

ली कुआन यू के नेतृत्व में बदलाव

  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, ली कुआन यू की सरकार ने आवास एवं विकास कार्यक्रम शुरू किया।
  • सरकार ने लगभग 86% आबादी को नए और बेहतर मकान उपलब्ध कराए, जिससे शहर का सामाजिक और भौतिक ढांचा बदला।
  • ऊँची इमारतों में हवा निकासी, सुरक्षा और सामुदायिक जीवन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए।
  • सामुदायिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बाहरी गलियारे और सामुदायिक हॉल बनाए गए, जिससे अपराध दर में कमी आई।

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