9.स्वामी दयानन्दः Notes
संस्कृत (पीयूषम्)
नवमः पाठः : स्वामी दयानन्दः
बिहार बोर्ड कक्षा 10 - हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्न-उत्तर
पाठ परिचय
आधुनिक भारत में समाज-सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी दयानंद का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने 'आर्य समाज' की स्थापना की, कुरीतियों का खंडन किया और वेदों के ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाया। यह पाठ उनके जीवन, विचारों और समाज-सुधार के कार्यों का वर्णन करता है।
गद्यांश एवं हिन्दी अनुवाद
मध्यकालीन समाज की स्थिति
मध्यकाले नाना कुत्सितरीतयः भारतीयं समाजम् अदूषयन्। जातिवादकृतं वैषम्यम्, अस्पृश्यता, धर्मकार्येषु आडम्बरः... तेषु नूनं स्वामी दयानन्दः विचाराणां व्यापकत्वात् समाजोद्धरणस्य संकल्पाच्च शिखर-स्थानीयः।
हिन्दी अनुवाद: मध्यकाल में अनेक बुरी रीतियों (जातिवाद, छुआछूत, धार्मिक आडम्बर, अशिक्षा, विधवाओं की बुरी स्थिति) ने समाज को दूषित कर दिया था। इस कारण कई दलितों ने धर्म-परिवर्तन कर लिया। ऐसे कठिन समय में (19वीं शताब्दी में) कुछ समाज-सुधारक उत्पन्न हुए, जिनमें स्वामी दयानंद अपने व्यापक विचारों और दृढ़ संकल्प के कारण सर्वोच्च स्थान पर हैं।
जन्म और वैराग्य
स्वामिनः जन्म गुजरातप्रदेशस्य टंकारानामके ग्रामे 1824 ईस्वी वर्षेऽभूत्। बालकस्य नाम मूलशङ्करः इति कृतम्। ... विरजानन्दस्य उपदेशात् वैदिकधर्मस्य प्रचारे सत्यस्य प्रसारे च स्वजीवनमसावर्पितवान्।
हिन्दी अनुवाद: स्वामी जी का जन्म गुजरात के 'टंकारा' गाँव में 1824 ई. में हुआ। बचपन का नाम मूलशंकर था। शिवरात्रि की रात चूहों को मूर्ति पर चढ़कर प्रसाद खाते देख उन्हें मूर्तिपूजा पर अविश्वास (अनास्था) हो गया। बहन की मृत्यु के बाद वे घर छोड़कर वैराग्य धारण कर मथुरा गए। वहाँ अंधे विद्वान विरजानंद से वेदों की शिक्षा ली और वैदिक धर्म के प्रचार में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
समाज सुधार और आर्य समाज की स्थापना
स्त्रीशिक्षायाः विधवाविवाहस्य मूर्तिपूजाखण्डनस्य अस्पृश्यतायाः बालविवाहस्य च निवारणस्य तेन महान् प्रयासः... 1875 ईस्वी वर्षे मुम्बईनगरे 'आर्यसमाज'संस्थायाः स्थापनां कृत्वा...
हिन्दी अनुवाद: उन्होंने स्त्री-शिक्षा, विधवा-विवाह का समर्थन और मूर्तिपूजा, छुआछूत, बाल-विवाह का विरोध किया। अपने सिद्धांतों के प्रचार के लिए 'सत्यार्थप्रकाश' नामक ग्रंथ हिन्दी में लिखा। वेदों का भाष्य (टीका) संस्कृत और हिन्दी दोनों में किया। 1875 ई. में मुम्बई में 'आर्य समाज' की स्थापना कर समाज-सुधार को एक संगठित रूप दिया।
आर्य समाज का वर्तमान स्वरूप
सम्प्रति आर्यसमाजस्य शाखाः प्रशाखाश्च देशे विदेशेषु च प्रायेण प्रतिनगरं वर्तन्ते। ... शिक्षापद्धतौ गुरुकुलानां डी० ए० वी० (दयानन्द एङ्ग्लो वैदिक) विद्यालयानाञ्च समूहः...
हिन्दी अनुवाद: आज देश-विदेश में आर्य समाज की अनेक शाखाएँ हैं जो समाज और शिक्षा के दोषों को दूर कर रही हैं। स्वामी जी की मृत्यु (1883 ई.) के बाद उनके अनुयायियों ने गुरुकुल और डी.ए.वी. (DAV) शिक्षण संस्थानों की शुरुआत की। उनका यह योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
1. शब्दार्थ (Word Meanings)
| संस्कृत शब्द | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| अदूषयन् | दूषित किया |
| वैषम्यम् | असमानता (भेदभाव) |
| अकिञ्चित्करः | व्यर्थ (तुच्छ) |
| प्रज्ञाचक्षुषः | अंधे विद्वान (ज्ञाननेत्र वाले) |
| सम्प्रति | इस समय (आजकल) |
अभ्यासः (मौखिक)
- 🔹 स्वामी दयानन्दः कः आसीत्? - महान् समाजोद्धारकः / आर्यसमाजस्य संस्थापकः
- 🔹 बालकस्य मूलनाम किम्? - मूलशङ्करः
- 🔹 कुत्र जन्म अभवत्? - टंकारा ग्रामे (गुजरात)
- 🔹 कस्य उपदेशात् वैदिकधर्मस्य प्रचारं कृतवान्? - विरजानन्दस्य
अभ्यासः (लिखित)
1. एक पदेन/वाक्येन उत्तरत
- मध्यकाले काः भारतीयसमाजम् अदूषयन्? उत्तर: कुत्सितरीतयः
- विग्रहार्पितानि द्रव्याणि के भक्षयन्ति स्म? उत्तर: मूषकाः (चूहे)
- रात्रिजागरणं विहाय मूलशङ्करः कुत्र गतः? उत्तर: गृहम्
- दयानन्दः कस्य संस्थायाः स्थापनां चकार? उत्तर: आर्यसमाजस्य
- 'सत्यार्थप्रकाश' कस्य रचना अस्ति? उत्तर: स्वामी दयानन्दस्य
2. रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) स्वामी दयानन्दः ............ आसीत्।
उत्तर: समाजोद्धारकः
(ख) बालकस्य नाम ............ इति कृतम्।
उत्तर: मूलशङ्करः
(ग) ............ द्रव्याणि मूषकाः भक्षयन्ति।
उत्तर: विग्रहार्पितानि
(घ) दयानन्दस्य योगदानं सदा ............ अस्ति।
उत्तर: स्मरणीयम्
3. व्याकरण विशेष
संधि-विच्छेद
- संकल्पाच्च = संकल्पात् + च
- धर्मान्तरणम् = धर्म + अन्तरणम्
- सत्यान्वेषिणः = सत्य + अन्वेषिणः
- वर्षेऽभूत् = वर्षे + अभूत्
समास विग्रह
- धर्मोद्धारकः - धर्मस्य उद्धारकः (षष्ठी तत्पुरुष)
- संस्कृतशिक्षा - संस्कृतस्य शिक्षा (षष्ठी तत्पुरुष)
- प्रज्ञाचक्षुषः - प्रज्ञा एव चक्षुः यस्य सः (बहुव्रीहि)
-- कक्षा 10 संस्कृत (बिहार बोर्ड) --
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