9.हमारी नींद Notes
काव्य खंड - अध्याय 9: हमारी नींद
गोधूलि भाग-2 (कविता - वीरेन डंगवाल)
1. कवि परिचय: वीरेन डंगवाल
परिचय: वीरेन डंगवाल का जन्म 5 अगस्त 1947 को कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) में हुआ था।
- पेशा: वे पत्रकारिता और प्राध्यापन (Teaching) से जुड़े रहे।
- काव्य संग्रह: 'इसी दुनिया में', 'दुष्चक्र में स्रष्टा'।
- सम्मान: उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, श्रीकांत वर्मा स्मृति पुरस्कार और शमशेर सम्मान से नवाजा गया।
- विशेषता: उनकी कविताओं में समाज के साधारण जन और हाशिए (Margin) पर खड़े लोगों का जीवन दिखता है।
2. नींद और जीवन का विकास
नींद के दौरान: कवि कहते हैं कि "मेरी नींद के दौरान कुछ इंच बढ़ गए पेड़, कुछ सूत (Sut) पौधे।"
- अंकुर (Seedling) ने अपने कोमल सींगों से सख्त मिट्टी (छत) को धकेलना शुरू कर दिया।
- जीवन हठीला (Stubborn) है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता और आगे बढ़ता रहता है।
3. जीवन चक्र और गरीबी
(क) मक्खी का जीवन-क्रम
कवि कहते हैं कि हमारी एक नींद के दौरान ही एक मक्खी का पूरा जीवन-क्रम (Life Cycle) पूरा हो गया। कई शिशु पैदा हुए और उनमें से कई मर भी गए। यह जीवन की नश्वरता और तेजी को दर्शाता है।
(ख) गरीब बस्तियों में धमाके
कवि व्यंग्य करते हैं कि गरीब बस्तियों में भी अब 'देवी जागरण' लाउडस्पीकर पर धमाके के साथ हो रहा है।
अर्थ: गरीब लोगों के पास खाने को नहीं है, लेकिन वे भी धार्मिक आडंबरों और शोर-शराबे में उलझे हुए हैं, या शायद शोषक वर्ग उन्हें इसमें उलझाए रखता है।
4. अत्याचारी और हमारी बेफिक्री
कवि कहते हैं कि अत्याचारी (Oppressor) के पास अब भी सारे साधन मौजूद हैं।
- हमारी 'नींद' (लापरवाही/अज्ञानता) के बावजूद अत्याचारी अपना काम कर रहे हैं।
- जो लोग सब कुछ जानते हैं, फिर भी चुप हैं और सुविधाभोगी बनकर सोए हुए हैं, कवि उन पर भी कटाक्ष करते हैं।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- हठीला जीवन: जीवन को 'हठीला' कहा गया है क्योंकि वह रुकता नहीं है।
- धमाके: देवी जागरण 'धमाके' से हुआ।
- साधन: अत्याचारियों ने अपने 'साफ़-सुथरे' (दिखावटी) साधन जुटा लिए हैं।
- इंकार: कविता का अंत 'साफ इंकार' करने वाले लोगों की बात से होता है।
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