8.एक वृक्ष की हत्या Notes
काव्य खंड - अध्याय 8: एक वृक्ष की हत्या
गोधूलि भाग-2 (कविता - कुँवर नारायण)
1. कवि परिचय: कुँवर नारायण
परिचय: कुँवर नारायण का जन्म 19 सितंबर 1927 को लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे 'नई कविता' आंदोलन के प्रमुख कवि हैं।
- विशेषता: वे 'नगर संवेदना' (Urban Sensibility) के कवि माने जाते हैं।
- प्रमुख रचनाएँ: 'चक्रव्यूह', 'परिवेश: हम-तुम', 'अपने सामने', 'कोई दूसरा नहीं', 'इन दिनों'।
- प्रबंध काव्य: 'आत्मजयी'।
- सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार।
2. बूढ़ा चौकीदार वृक्ष
कवि का अनुभव: कवि जब भी घर लौटते थे, तो दरवाजे पर तैनात एक पुराने वृक्ष को देखते थे। कवि ने इस वृक्ष की तुलना एक 'बूढ़े चौकीदार' से की है।
- वर्दी: पेड़ की छाल 'मटमैली' और 'पुराने चमड़े' जैसी सख्त थी (जैसे चौकीदार की खाकी वर्दी)।
- शरीर: तना सूखा और झुर्रीदार था, लेकिन मजबूत (सख्त जान) था।
- राइफल: पेड़ की एक सूखी डाल राइफल जैसी लगती थी।
- पगड़ी: पेड़ के ऊपर फूल-पत्तियों का छत्र एक 'पगड़ी' जैसा दिखता था।
- जूता: जड़े पुराने फटे जूते जैसी लगती थीं।
3. संवाद और मित्रता
कौन? - दोस्त!
जब भी कवि घर आते, तो पेड़ दूर से ही ललकारता- "कौन?"
कवि जवाब देते- "दोस्त!"
इसके बाद कवि पलभर के लिए उसकी ठंडी छांव में बैठ जाते। वह वृक्ष सर्दी, गर्मी और बरसात में हमेशा अपनी खाकी वर्दी में तैनात रहता था।
4. हत्या और चेतावनी
(क) वृक्ष की हत्या
इस बार जब कवि घर लौटे, तो उन्होंने देखा कि वह पेड़ वहाँ नहीं था। उसे काट दिया गया था। यह कवि के लिए एक 'हत्या' थी, जिसने उनके 'घर' (पर्यावरण) की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया।
(ख) बचाना है...
कवि चेतावनी देते हैं कि हमें बचाना होगा:
- घर को लुटेरों से।
- शहर को नादिरशाहों (हत्यारों) से।
- नदियों को नाला हो जाने से।
- हवा को धुआँ हो जाने से।
- खाने को जहर हो जाने से।
- जंगल को मरुस्थल हो जाने से।
- मनुष्य को जंगल (असंवेदनशील) हो जाने से।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- प्रतीक: बूढ़ा चौकीदार = पुराना वृक्ष।
- अंदेशा: कवि को शुरू से ही अंदेशा था कि कोई 'जानी दुश्मन' इस पेड़ को मार डालेगा।
- राइफल: सूखी डाल की तुलना राइफल से की गई है।
- पगड़ी: फूल-पत्तीदार शीर्ष की तुलना पगड़ी से की गई है।
- संदेश: यह कविता पर्यावरण और मानवीय संवेदना बचाने की अपील करती है।
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