7.हिरोशिमा Notes
काव्य खंड - अध्याय 7: हिरोशिमा
गोधूलि भाग-2 (कविता - अज्ञेय)
1. कवि परिचय: अज्ञेय
परिचय: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का जन्म 7 मार्च 1911 को कुशीनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
- युग: वे 'प्रयोगवाद' और 'नई कविता' के प्रवर्तक माने जाते हैं।
- तार सप्तक: उन्होंने 'तार सप्तक' का संपादन किया।
- प्रमुख रचनाएँ: 'शेखर: एक जीवनी', 'नदी के द्वीप', 'कितनी नावों में कितनी बार', 'आँगन के पार द्वार'।
- सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार।
- निधन: 4 अप्रैल 1987 ई.।
2. मानव निर्मित सूरज
अचानक निकला सूरज: कवि कहते हैं कि एक दिन अचानक सूरज निकला, लेकिन यह सूरज क्षितिज (आसमान) पर नहीं, बल्कि नगर के चौक पर निकला।
- प्राकृतिक सूरज पूरब से निकलता है, लेकिन यह (परमाणु बम रूपी) सूरज धरती फाड़कर निकला।
- इसकी धूप अंतरिक्ष से नहीं, बल्कि फटी हुई मिट्टी से बरसी।
- यह सूरज मानव द्वारा बनाया गया 'काल सूर्य' (मौत का सूरज) था।
3. दिशाहीन छायाएँ
(क) भाप बने मानव
आमतौर पर परछाई (Shadow) सूर्य के विपरीत दिशा में बनती है। लेकिन उस दिन प्रकाश इतना तीव्र और चारों तरफ था कि मानव की छायाएँ दिशाहीन हो गईं। मनुष्य के शरीर तुरंत भाप बनकर उड़ गए।
(ख) पत्थर पर लिखी साखी
परमाणु बम की गर्मी इतनी तेज थी कि पत्थर और सड़कें तक पिघल गईं। उस समय वहाँ खड़े इंसानों की परछाइयाँ हमेशा के लिए झुलसे हुए पत्थरों पर छप गईं। यह मानव के विनाश की गवाही (साखी) है।
4. विज्ञान का दुरुपयोग
कवि व्यंग्य करते हैं कि:
अर्थात, जिस विज्ञान को मनुष्य ने अपनी भलाई के लिए बनाया था, उसी ने उसका विनाश कर दिया। यह कविता हमें चेतावनी देती है कि विज्ञान का दुरुपयोग मानवता के लिए कितना घातक हो सकता है।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- सूरज: यहाँ 'सूरज' शब्द परमाणु बम (Atomic Bomb) का प्रतीक है।
- काल-सूर्य के रथ: विस्फोट के समय ऐसा लगा जैसे मौत के देवता (काल) के रथ के पहिए टूटकर दसों दिशाओं में बिखर गए हों।
- प्रज्वलित क्षण: वह विनाशकारी घटना केवल कुछ ही पलों (क्षण) की थी, जिसमें दोपहर जैसी भीषण गर्मी पैदा हुई।
- साखी: इसका अर्थ है 'साक्षी' (Gawah/Witness)।
Comments
Post a Comment