7.परंपरा का मूल्यांकन Notes
अध्याय 7: परंपरा का मूल्यांकन
गोधूलि भाग-2 (निबंध - रामविलास शर्मा)
1. लेखक परिचय: रामविलास शर्मा
परिचय: हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक और विचारक डॉ. रामविलास शर्मा का जन्म 10 अक्टूबर 1912 को उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के ऊँचगाँव सानी में हुआ था।
- वे प्रगतिवादी विचारधारा के प्रमुख आलोचक थे।
- प्रमुख रचनाएँ: 'निराला की साहित्य साधना', 'भारत की भाषा समस्या', 'परंपरा का मूल्यांकन', 'नई कविता और अस्तित्ववाद'।
- सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार और व्यास सम्मान (भारत के पहले विजेता)।
- निधन: 30 मई 2000 ई. (दिल्ली)।
2. परंपरा का ज्ञान किसके लिए जरूरी है?
लेखक के अनुसार, परंपरा का ज्ञान उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है जो:
- रूढ़ियों (पुरानी बेकार आदतों) को तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं।
- जो साहित्य के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना चाहते हैं।
3. साहित्य और समाज का संबंध
(क) साहित्य की सापेक्ष स्वाधीनता
लेखक कहते हैं कि साहित्य पूरी तरह समाज या अर्थव्यवस्था पर निर्भर नहीं होता। साहित्यकार अपनी प्रतिभा से ऐसी रचनाएँ करता है जो कालजयी (Time-less) होती हैं।
(ख) अविच्छिन्न परंपरा
भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि यहाँ रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ आज भी प्रासंगिक हैं। हमारी राष्ट्रीयता और इतिहास का प्रवाह अविच्छिन्न (टूटा नहीं) है।
4. भारत की 'बहुजातीयता' और एकता
लेखक के अनुसार, भारत एक 'बहुजातीय राष्ट्र' (Multi-ethnic nation) है, लेकिन इसकी एकता अद्भुत है।
- यहाँ की विभिन्न जातियाँ अपनी-अपनी पहचान (अस्मिता) बनाए रखते हुए भी भारतीय संस्कृति से जुड़ी हैं।
- जैसे बंगाल विभाजन हुआ, लेकिन बंगालियों ने अपनी सांस्कृतिक एकता नहीं छोड़ी।
- लेखक का सपना है कि भविष्य के समाजवादी भारत में भी यह सांस्कृतिक एकता और मजबूत होगी।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- प्रश्न: परंपरा का ज्ञान किसके लिए आवश्यक है? (उत्तर: जो साहित्य में युग-परिवर्तन करना चाहते हैं)।
- जारशाही: रूस की पुरानी शासन व्यवस्था (जार) का उल्लेख पाठ में समाजवाद के संदर्भ में आया है।
- विचारधारा: रामविलास शर्मा मार्क्सवादी और प्रगतिवादी विचारक थे।
- सभ्यता vs संस्कृति: लेखक ने बताया है कि सभ्यता (भौतिक विकास) बदलती रहती है, लेकिन संस्कृति (आंतरिक गुण) स्थाई होती है।
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