कक्षा 10
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5.भारतमाता Notes

काव्य खंड - अध्याय 5: भारतमाता

गोधूलि भाग-2 (कविता - सुमित्रानंदन पंत)

पाठ परिचय: प्रस्तुत कविता 'भारतमाता' आजादी से पहले के गुलाम भारत का एक मार्मिक चित्र है। इसमें कवि ने भारतमाता को 'ग्रामवासिनी' (गाँव में रहने वाली) के रूप में चित्रित किया है, जो गरीबी और गुलामी के कारण उदास है। यह कविता उनके काव्य संग्रह 'ग्राम्या' से संकलित है।

1. कवि परिचय: सुमित्रानंदन पंत

परिचय: सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई 1900 ई. को कौसानी, अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में हुआ था। उन्हें 'प्रकृति का सुकुमार कवि' कहा जाता है।

महत्वपूर्ण बिंदु:
  • युग: वे छायावाद (Chhayavad) के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ: 'उच्छ्वास', 'पल्लव', 'वीणा', 'युगांत', 'ग्राम्या'।
  • सम्मान: उन्हें 'चिदंबरा' रचना के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। इसके अलावा 'पद्म भूषण' से भी सम्मानित हुए।
  • निधन: 29 दिसंबर 1977 ई.।

2. भारतमाता: ग्रामवासिनी

गाँव ही असली भारत है: कवि कहते हैं कि भारतमाता शहरों में नहीं, बल्कि गाँवों में बसती है (ग्रामवासिनी)।

दुर्दशा का चित्रण:
  • आँचल: भारतमाता का आँचल धूल से भरा और मैला (श्यामल) है।
  • आँसू: गंगा और यमुना नदियाँ भारतमाता की आँखों से बहते आँसू हैं।
  • मिट्टी की प्रतिमा: वह गरीबी और दुख के कारण एक 'उदासीन मिट्टी की मूर्ति' जैसी हो गई है।

3. 30 करोड़ संतानों का दुख

(क) नग्न और भूखी

उस समय भारत की जनसंख्या 30 करोड़ थी। कवि कहते हैं कि भारतमाता की ये संतानें नंगी (वस्त्रहीन), भूखी, शोषित और निहत्थी हैं।

(ख) मूढ़ और असभ्य

गुलामी ने भारतीयों को अशिक्षित और असभ्य बना दिया है। भारतमाता अपनी ही संतानों की यह दशा देखकर पेड़ों के नीचे (तरु-तल) सिर झुकाए बैठी है।

4. परदेसी और आशा की किरण

अपने घर में प्रवासिनी: भारतमाता अपने ही देश में एक परदेसी (प्रवासिनी) की तरह रह रही है क्योंकि शासन अंग्रेजों का है।

राहु-ग्रसित: कवि ने भारतमाता की तुलना 'शरद पूर्णिमा के चाँद' से की है, जिसे राहु (गुलामी) ने ग्रस लिया है। लेकिन अंत में कवि कहते हैं कि गाँधीजी के 'सत्य और अहिंसा' के तप से भारतमाता फिर से मुक्त होंगी और दुनिया को ज्ञान (गीता) का प्रकाश देंगी।

परीक्षा सारांश (Exam Highlights)

  • संतान: कविता में 'तीस कोटि' (30 करोड़) संतान का उल्लेख है।
  • गीता-प्रकाशिनि: अंत में भारतमाता को 'जग-जननी' और 'गीता-प्रकाशिनि' कहा गया है।
  • सफल आज: कवि कहते हैं कि गाँधीजी की तपस्या से भारतमाता का 'तप-संयम' आज सफल हुआ है।
  • चित्रण: यह कविता यथार्थवादी (Realistic) चित्रण प्रस्तुत करती है।

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