4.स्वदेशी Notes
काव्य खंड - अध्याय 4: स्वदेशी
गोधूलि भाग-2 (दोहे - बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन')
1. कवि परिचय: बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'
परिचय: 'प्रेमघन' जी भारतेंदु युग के एक महत्वपूर्ण कवि थे। उनका जन्म 1855 ई. में मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
- पत्रिकाएँ: उन्होंने 'आनंद कादंबिनी' (मासिक) और 'नागरी नीरद' (साप्ताहिक) पत्रिकाओं का संपादन किया।
- रचनाएँ: 'जीर्ण जनपद', 'भारत सौभाग्य', 'प्रयाग रामागमन'।
- आदर्श: वे भारतेंदु हरिश्चंद्र को अपना आदर्श मानते थे।
- निधन: 1922 ई. में।
2. भारतीयता की पहचान खो गई
कवि कहते हैं कि आजकल भारत में 'भारतीयता' (Indianness) कहीं दिखाई नहीं देती।
- वेशभूषा: लोग विदेशी कपड़े पहनते हैं।
- भाषा: लोग आपस में अंग्रेजी बोलते हैं, हिंदी बोलने में उन्हें शर्म आती है।
- व्यवहार: लोगों की चाल-ढाल और रीति-रिवाज सब विदेशी (अंग्रेजी) हो गए हैं।
- "सबै बिदेसी वस्तु नर, गति रति रीत लखात। भारतीयता कछू न अब, भारत म दरसात।।"
3. डफाली और खुशामद
(क) डफाली (Dafali)
कवि ने भारतीय नेताओं और अमीरों को 'डफाली' (बाजा बजाने वाला) कहा है।
कारण: क्योंकि ये लोग अंग्रेजों की झूठी प्रशंसा (खुशामद) करते हैं और अपनी संस्कृति की रक्षा करने के बजाय विदेशी शासन का गुणगान करते हैं।
(ख) धोती ढीली-ढाली
कवि व्यंग्य करते हैं कि जिन नेताओं से अपनी ढीली-ढाली धोती (अर्थात अपना पहनावा/संस्कृति) नहीं संभलती, वे देश का शासन (प्रबंध) कैसे संभालेंगे?
4. बाजार और अर्थव्यवस्था
कवि देखते हैं कि भारत के नगर और बाजार विदेशी सामानों से भरे पड़े हैं।
- लोगों को अब 'देसी' चीजें अच्छी नहीं लगतीं।
- सभी को 'अंग्रेजी' (English) चीजें ही पसंद आ रही हैं।
- यहाँ तक कि लोगों की इच्छाएँ (Abhilasha) भी अब विदेशी हो गई हैं।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- किरिस्तान: कविता में 'किरिस्तान' (Christian) शब्द का प्रयोग अंग्रेजी संस्कृति को अपनाने वालों के लिए हुआ है।
- रसिक समाज: प्रेमघन ने मिर्जापुर में 'रसिक समाज' की स्थापना की थी।
- दोहा: यह कविता दोहा छंद में लिखी गई है।
- संदेश: हमें अपनी संस्कृति और स्वदेशी वस्तुओं पर गर्व करना चाहिए।
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