3.अलसकथा Notes
संस्कृत (पीयूषम्)
तृतीयः पाठः : अलसकथा (Alaskatha)
बिहार बोर्ड कक्षा 10 - हिन्दी अनुवाद एवं प्रश्न-उत्तर
पाठ परिचय
यह पाठ विद्यापति द्वारा रचित कथा-ग्रन्थ 'पुरुषपरीक्षा' का एक अंश है। विद्यापति एक लोकप्रिय मैथिली कवि थे। इस पाठ में 'आलस्य' नामक दोष को दूर करने के लिए एक व्यंग्यात्मक कथा प्रस्तुत की गई है। नीतिकार आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु मानते हैं।
गद्यांश एवं हिन्दी अनुवाद
आसीत् मिथिलायां वीरेश्वरो नाम मन्त्री। स च स्वभावाद् दानशीलः कारुणिकश्च सर्वेभ्यो दुर्गतेभ्योऽनाथेभ्यश्च प्रत्यहमिच्छाभोजनं दापयति। ... निर्गतीनां च सर्वेषामलसः प्रथमो मतः।
हिन्दी अनुवाद: मिथिला में वीरेश्वर नाम का एक मंत्री था। वह स्वभाव से दानशील और दयालु था तथा सभी संकटग्रस्तों और अनाथों को प्रतिदिन भरपेट भोजन देता था। वह आलसियों को भी अन्न-वस्त्र देता था क्योंकि "सभी अकर्मण्यों में आलसी का स्थान पहला है, जो पेट की आग (भूख) सहकर भी कुछ काम नहीं करना चाहता।"
ततोऽलसपुरुषाणां तत्रेष्टलाभं श्रुत्वा बहवस्तुन्दपरिमृजास्तत्र वर्तुलीबभूवुः। ... सजातीनां सुखं दृष्ट्वा के न धावन्ति जन्तवः॥
हिन्दी अनुवाद: आलसियों को मुफ्त में भोजन मिलते देख, वहाँ बहुत से तोंद वाले (धूर्त) लोग भी जमा हो गए। क्योंकि सुविधाजनक स्थिति सबको अच्छी लगती है। अपनी जाति (स्वभाव) वालों का सुख देखकर कौन उसकी ओर नहीं दौड़ता?
पश्चादलसानां सुखं दृष्ट्वा धूर्ता अपि कृत्रिममालस्यं दर्शयित्वा भोज्यं गृह्णन्ति। ... तन्नियोगिपुरुषाः वह्निं दापयित्वा निरूपयामासुः।
हिन्दी अनुवाद: बाद में धूर्त लोग भी बनावटी आलस्य दिखाकर भोजन लेने लगे। जब खर्च बहुत बढ़ गया, तो मंत्री के कर्मचारियों ने उनकी परीक्षा लेने का सोचा। उन्होंने विचार किया कि स्वामी तो केवल सच्चे आलसियों को दान देते हैं। इसलिए जब सब सो रहे थे, तब उन्होंने आलसशाला में आग लगा दी।
ततो गृहलग्नं प्रवृद्धमग्निं दृष्ट्वा धूर्ताः सर्वे पलायिताः। ... चत्वारः पुरुषास्तत्रैव सुप्ताः परस्परमालपन्ति।
हिन्दी अनुवाद: आग देखकर सभी धूर्त भाग गए। लेकिन चार आलसी वहीं सोए रहे और बातें करने लगे:
1. पहले ने (मुँह ढके हुए) कहा - "अरे! यह कैसा शोर है?"
2. दूसरे ने कहा - "लगता है घर में आग लग गई है।"
3. तीसरे ने कहा - "कोई ऐसा धार्मिक व्यक्ति नहीं है जो हमें भीगे कपड़े या चटाई से ढँक दे?"
4. चौथे ने कहा - "अरे वाचालों! कितना बोलते हो? चुपचाप क्यों नहीं रहते?"
ततश्चतुर्णामपि तेषामेवं परस्परालापं श्रुत्वा ... नियोगिपुरुषैर्वधभयेन चत्वारोऽप्यलसाः केशेष्वाकृष्य गृहीत्वा गृहाद् बहिः कृताः।
हिन्दी अनुवाद: उनकी बातें सुनकर और आग को ऊपर गिरते देख, कर्मचारियों ने उन्हें जलने के डर से बालों से पकड़कर बाहर निकाला। उन्होंने निष्कर्ष निकाला - "स्त्रियों का रक्षक पति है, बच्चों का माँ है, लेकिन आलसियों का रक्षक दयालु व्यक्ति के अलावा कोई नहीं है।" इसके बाद मंत्री ने उन्हें और अधिक धन-धान्य दिया।
1. शब्दार्थ (Word Meanings)
| संस्कृत शब्द | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| अलसः | आलसी |
| कारुणिकः | दयावान |
| रिपुः | शत्रु |
| जाठरेण | पेट (भूख) से |
| तुन्दपरिमृजाः | पेटू (तोंद बढ़ाने वाले) |
| वह्निम् | आग को |
अभ्यासः (मौखिक)
1. एक पदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें):
- 🔹 अग्निं दृष्ट्वा के पलायिताः? (आग देखकर कौन भागे?) - धूर्ताः
- 🔹 कति पुरुषाः सुप्ता आसन्? (कितने पुरुष सोए रहे?) - चत्वारः
- 🔹 वीरेश्वरः कः आसीत्? (वीरेश्वर कौन था?) - मन्त्री
- 🔹 तस्य स्वभावः कीदृशः आसीत्? (उसका स्वभाव कैसा था?) - दानशीलः कारुणिकश्च
- 🔹 अलसकथायाः कथाकारः कः? - विद्यापतिः
2. किसने क्या कहा? (चार आलसियों का संवाद)
- 🔸 पहला: "अहो कथमयं कोलाहलः?" (यह कैसा शोर है?)
- 🔸 दूसरा: "तर्क्यते यदस्मिन् गृहे अग्निर्लग्नोऽस्ति।" (लगता है घर में आग लगी है।)
- 🔸 तीसरा: "कोऽपि... जलार्द्रैर्वासोभिः... अस्मान् प्रावृणोति।" (कोई हमें भीगे कपड़े से ढँक दे।)
- 🔸 चौथा: "अये वाचालाः! तूष्णीं कथं न तिष्ठथ?" (चुप क्यों नहीं रहते?)
अभ्यासः (लिखित)
1. रिक्तस्थानानि पूरयत (रिक्त स्थान भरें)
- स्थितिः सौकर्यमूला हि सर्वेषामपि संहते।
- निर्गतीनां च सर्वेषामलसः प्रथमो मतः।
- विद्यापतिः लोकप्रियः मैथिलीकविः आसीत्।
- नीतिकाराः आलस्यं रिपुरूपं मन्यन्ते।
- आसीत् मिथिलायां वीरेश्वरो नाम मन्त्री।
2. पूर्णवाक्येन उत्तराणि दत्त
(क) मिथिलायां कः मन्त्री आसीत्?
उत्तर: मिथिलायां वीरेश्वरो नाम मन्त्री आसीत्।
(ख) धूर्ताः किं दृष्ट्वा पलायनं कृतवन्तः?
उत्तर: धूर्ताः गृहलग्नं प्रवृद्धमग्निं दृष्ट्वा पलायनं कृतवन्तः।
(ग) अलसानां कः शरणदः?
उत्तर: लोके कारुणिकं विना अलसानां कोऽपि शरणदः नास्ति।
(घ) भीषणबुभुक्षया अपि कः किमपि कर्तुं न क्षमते?
उत्तर: भीषणबुभुक्षया अपि अलसः किमपि कर्तुं न क्षमते।
3. व्याकरण विशेष
संधि-विच्छेद
- विद्यापतिरासीत् = विद्यापतिः + आसीत्
- निर्मातापि = निर्माता + अपि
- अग्निर्लग्नोऽस्ति = अग्निः + लग्नः + अस्ति
- तृतीयेनोक्तम् = तृतीयेन + उक्तम्
- कारुणिकश्च = कारुणिकः + च
समास विग्रह
- पुरुषपरीक्षा - पुरुषस्य परीक्षा (षष्ठी तत्पुरुष)
- मैथिलीकविः - मैथिलीभाषायाः कविः (षष्ठी तत्पुरुष)
- नियोगिपुरुषैः - नियोगिनः च ते पुरुषाः (कर्मधारय)
-- कक्षा 10 संस्कृत (बिहार बोर्ड) --
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