3.अति सूधो सनेह को मारग है Notes
काव्य खंड - अध्याय 3: अति सूधो सनेह को मारग है
गोधूलि भाग-2 (सवैया - घनानंद)
पाठ परिचय: प्रस्तुत पाठ में 'रीतिमुक्त' काव्यधारा के सिरमौर कवि घनानंद के दो छंद संकलित हैं। पहले छंद में उन्होंने प्रेम के सरल मार्ग का वर्णन किया है और दूसरे छंद में अपनी विरह-वेदना (Separation pain) को बादलों के माध्यम से व्यक्त किया है।
1. कवि परिचय: घनानंद
जीवन परिचय: घनानंद का जन्म 1689 ई. के आसपास हुआ था। वे मुगल बादशाह 'मुहम्मद शाह रंगीला' के यहाँ मीर मुंशी का काम करते थे।
प्रेम और धोखा:
वे 'सुजान' नामक नर्तकी (Dancer) से बेपनाह मोहब्बत करते थे। विराग (Breakup) होने पर वे वृंदावन चले गए और वैष्णव होकर काव्य रचना करने लगे।
निधन: 1739 ई. में नादिरशाह के सैनिकों ने उन्हें मार डाला। सैनिकों ने उनसे तीन बार 'जर, जर, जर' (सोना) माँगा, तो उन्होंने तीन बार 'रज, रज, रज' (धूल) कहकर मिट्टी उड़ा दी। गुस्से में सैनिकों ने उनका वध कर दिया।
प्रमुख रचनाएँ: 'सुजान सागर', 'विरह लीला', 'रस्केलि वल्ली'।
निधन: 1739 ई. में नादिरशाह के सैनिकों ने उन्हें मार डाला। सैनिकों ने उनसे तीन बार 'जर, जर, जर' (सोना) माँगा, तो उन्होंने तीन बार 'रज, रज, रज' (धूल) कहकर मिट्टी उड़ा दी। गुस्से में सैनिकों ने उनका वध कर दिया।
प्रमुख रचनाएँ: 'सुजान सागर', 'विरह लीला', 'रस्केलि वल्ली'।
2. प्रथम छंद: अति सूधो सनेह को मारग है
मुख्य भाव: कवि कहते हैं कि "प्रेम का मार्ग अत्यंत सीधा और सरल (सूधो) है।"
विशेषताएँ:
- छल-कपट नहीं: इस रास्ते पर 'सयानप' (चतुराई) और 'बांकपन' (टेढ़ापन) की कोई जगह नहीं है। यहाँ केवल सच्चे दिल वाले ही चल सकते हैं, कपटी लोग नहीं।
- झिझक नहीं: जो सच्चे प्रेमी होते हैं, वे बिना किसी झिझक के इस रास्ते पर चलते हैं।
- एकतरफा प्रेम: कवि अपनी प्रेमिका सुजान से शिकायत करते हैं कि "तुमने तो कौन सी पट्टी (पाठ) पढ़ी है कि 'मन लेहु' (मेरा मन ले लिया) पर 'देहू छटाँक नहीं' (अपना थोड़ा सा भी प्रेम नहीं देती)।"
3. द्वितीय छंद: मो अँसुवानिहिं लै बरसौ
मुख्य भाव: यह विरह (Separation) का वर्णन है। कवि बादल (Cloud) से प्रार्थना करते हैं कि वह उनके आँसुओं को लेकर सुजान के आँगन में बरसा दे।
व्याख्या:
- परहित: कवि बादल से कहते हैं कि तुम्हारा तो जन्म ही 'परकाजहिं' (दूसरों के काम) के लिए हुआ है। तुम समुद्र के खारे पानी को अमृत जैसा मीठा बनाकर बरसाते हो।
- विरह के आँसू: कवि चाहते हैं कि बादल उनके हृदय की पीड़ा और आँसुओं को लेकर 'सुजान' के घर जाए और वहाँ बरसाए, ताकि सुजान को भी कवि की पीड़ा का अहसास हो सके।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- प्रेम के पीर: घनानंद को 'प्रेम की पीर' (Pain of Love) का कवि कहा जाता है।
- मन-माकु: यहाँ 'मन' (40 सेर) और 'छटाँक' (बहुत कम मात्रा) मुहावरे का प्रयोग हुआ है कि "पूरा मन ले लिया, पर बदला (छटाँक भर) भी नहीं दिया।"
- संदेश: प्रेम में केवल देना होता है, माँगना नहीं। यह त्याग का मार्ग है।
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