3.भारत से हम क्या सीखें Notes
अध्याय 3: भारत से हम क्या सीखें
गोधूलि भाग-2 (भाषण - मैक्स मूलर)
(हिंदी अनुवाद: डॉ. भवानी शंकर त्रिवेदी)
1. लेखक परिचय: फ्रेडरिक मैक्स मूलर
परिचय: मैक्स मूलर का जन्म 6 दिसंबर 1823 को जर्मनी के डेसाउ नगर में हुआ था। वे संस्कृत और वेदों के महान ज्ञाता थे। स्वामी विवेकानंद ने उन्हें "वेदांतियों का भी वेदांती" कहा था।
- उन्होंने 'हितोपदेश', 'मेघदूत' और उपनिषदों का जर्मन भाषा में अनुवाद किया।
- उनका मानना था कि संस्कृत दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है।
- निधन: 28 अक्टूबर 1900।
2. भारत की विशेषता (लेखक की दृष्टि में)
मैक्स मूलर कहते हैं कि यदि कोई मुझसे पूछे कि दुनिया में ऐसा कौन सा देश है जिसे प्रकृति ने अपनी सारी संपदा दी है और जहाँ "स्वर्ग की छटा" दिखाई देती है, तो मैं भारत का नाम लूँगा।
- भू-विज्ञान: हिमालय से श्रीलंका तक की विविधता।
- पुरातत्व: प्राचीन सिक्कों और औजारों का अध्ययन।
- भाषा विज्ञान: संस्कृत के माध्यम से यूरोपीय भाषाओं की जड़ों को समझना।
3. सच्चा भारत कहाँ बसता है?
गाँवों में ही सच्चा भारत है: मैक्स मूलर युवा अधिकारियों को समझाते हैं कि अगर आपको सच्चे भारत के दर्शन करने हैं, तो कलकत्ता, बंबई या मद्रास जैसे शहरों में मत ढूँढना। सच्चा भारत तो "गाँवों" में बसता है।
वहाँ के किसान, उनकी सादगी, और उनकी प्राचीन संस्कृति ही भारत की असली पहचान है।
4. संस्कृत का महत्व और वारेन हेस्टिंग्स की गलती
(क) संस्कृत: भाषाओं की जननी
संस्कृत के बिना विश्व का इतिहास अधूरा है। यह ग्रीक और लैटिन से भी पुरानी है।
- संस्कृत का 'अग्नि' शब्द लैटिन में 'इग्निस' (Ignis) बन गया।
- संस्कृत का 'मूष' (चूहा) ग्रीक में 'मुस' और अंग्रेजी में 'Mouse' बन गया।
(ख) वारेन हेस्टिंग्स की दुर्घटना
वाराणसी के पास वारेन हेस्टिंग्स को 172 दारिस (Daric) नामक सोने के सिक्कों से भरा घड़ा मिला था।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- लेखक: मैक्स मूलर (जर्मनी)।
- सच्चा भारत: गाँवों में बसता है।
- दारिस: प्राचीन काल का सोने का सिक्का।
- सीख: भारत की प्राचीन संस्कृति से हमें विश्व बंधुत्व और मानवता का पाठ सीखना चाहिए।
- उद्देश्य: यह पाठ हमें अपनी प्राचीन संस्कृति पर गर्व करना सिखाता है।
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