कक्षा 10
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12.Sanskrit Chapter-12 MCQ Test

Sanskrit MCQ Test - 50 Marks | Ayush Study Point

Sanskrit MCQ Test Chapter-12

कक्षा 10 बिहार बोर्ड परीक्षा पर आधारित
Q1. 'कर्णस्य दानवीरता' पाठ के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर: b
व्याख्या: यह पाठ महाकवि भास द्वारा रचित है।
Q2. यह पाठ किस रूपक (नाटक) का अंश है?
उत्तर: c
व्याख्या: यह पाठ 'कर्णभारम्' नामक एकांकी नाटक से लिया गया है।
Q3. कर्ण किस देश का राजा था?
उत्तर: b
व्याख्या: कर्ण 'अंगराज' (अंग देश का राजा) था।
Q4. कर्ण किसके पक्ष से युद्ध कर रहा था?
उत्तर: b
व्याख्या: महाभारत युद्ध में कर्ण कौरवों के पक्ष से लड़ रहा था।
Q5. ब्राह्मण (सक्र) के वेश में कौन आया था?
उत्तर: b
व्याख्या: अर्जुन की सहायता के लिए देवराज इन्द्र ब्राह्मण का वेश धरकर आए थे।
Q6. इन्द्र कर्ण से क्या छलने (मांगने) आए थे?
उत्तर: b
व्याख्या: कर्ण की रक्षा करने वाले जन्मजात 'कवच और कुण्डल' मांगने आए थे।
Q7. "महत्तरां भिक्षां याचे" (मैं बड़ी भिक्षा मांगता हूँ) - यह किसने कहा?
उत्तर: c
व्याख्या: ब्राह्मण वेशधारी इन्द्र (शक्र) ने कर्ण से बड़ी भिक्षा की मांग की।
Q8. कर्ण ने सबसे पहले भिक्षा में क्या देने को कहा?
उत्तर: c
व्याख्या: कर्ण ने सबसे पहले 'गोसहस्रम्' (हजारों गायें) देने का प्रस्ताव रखा।
Q9. इन्द्र ने "नेच्छामि नेच्छामि" (नहीं चाहिए, नहीं चाहिए) क्यों कहा?
उत्तर: b
व्याख्या: इन्द्र गाय, घोड़े, हाथी या सोना नहीं चाहते थे, उन्हें केवल कवच-कुण्डल चाहिए था।
Q10. कर्ण के शरीर की रक्षा कौन कर रहा था?
उत्तर: b
व्याख्या: जन्म से प्राप्त कवच और कुण्डल उसकी रक्षा करते थे, जिनके रहते उसे देवता भी नहीं मार सकते थे।
Q11. "अंगराज! न दातव्यम्, न दातव्यम्" (मत दीजिए, मत दीजिए) - यह किसने रोका?
उत्तर: a
व्याख्या: कर्ण के सारथी शल्य ने उसे कवच-कुण्डल देने से रोका।
Q12. समय बीतने पर क्या नष्ट हो जाता है?
उत्तर: d
व्याख्या: कर्ण श्लोक में कहता है कि समय के साथ शिक्षा क्षय हो जाती है, मजबूत जड़ों वाले पेड़ गिर जाते हैं, जल सूख जाता है (लेकिन दिया हुआ दान और हवन स्थिर रहता है)।
Q13. क्या सदैव स्थिर रहता है (कभी नष्ट नहीं होता)?
उत्तर: b
व्याख्या: "हुतं च दत्तं च तथैव तिष्ठति" - हवन किया हुआ और दान दिया हुआ हमेशा स्थिर रहता है।
Q14. कर्ण सूर्य की तरह किसे नमस्कार करता है?
उत्तर: c
व्याख्या: कर्ण ब्राह्मण (इन्द्र) के पास जाकर नमस्कार करता है। (प्रश्न में 'सूर्य' का उल्लेख कर्ण के पिता के संदर्भ में हो सकता है, पर यहाँ क्रिया नमस्कार की है)।
Q15. इन्द्र ने कर्ण को 'दीर्घायु भव' (लम्बी उम्र हो) का आशीर्वाद क्यों नहीं दिया?
उत्तर: c
व्याख्या: अगर वे दीर्घायु कहते तो कर्ण युद्ध में नहीं मरता, जो इन्द्र (अर्जुन के पिता) नहीं चाहते थे।
Q16. इन्द्र ने आशीर्वाद के स्थान पर क्या कहा?
उत्तर: d
व्याख्या: उन्होंने कहा - "सूर्य इव चन्द्र इव हिमवान् इव सागर इव तिष्ठतु ते यशः"।
Q17. कर्ण किसका पुत्र था?
उत्तर: a
व्याख्या: कर्ण कुन्ती का ज्येष्ठ पुत्र था, जिसका जन्म सूर्य देव के वरदान से हुआ था।
Q18. "कीचड़ में क्या डूब जाता है?" (पाठ के श्लोक के अनुसार शिक्षा क्षय होने की तुलना किससे की गई)?
उत्तर: d
व्याख्या: "निपतन्ति पादपाः" - समय बीतने पर मजबूत जड़ों वाले वृक्ष भी गिर जाते हैं।
Q19. कर्ण ने इन्द्र को अपना सिर (मस्तक) देने को कहा, तो इन्द्र ने क्या कहा?
उत्तर: b
व्याख्या: कर्ण के सिर देने के प्रस्ताव पर इन्द्र डर गए और बोले "अविहा! अविहा!" (ऐसा मत करो/अनर्थ)।
Q20. "तुम्हें नमस्कार करता हूँ" - यह किसने कहा?
उत्तर: b
व्याख्या: कर्ण ने कहा - "भगवन्! अहम् (मैं) त्वाम् (आपको) नमस्करोमि।"
Q21. भास के कितने नाटक उपलब्ध हैं?
उत्तर: b
व्याख्या: महाकवि भास के 13 नाटक (त्रयोदश) प्राप्त हुए हैं।
Q22. कर्ण ने कवच-कुण्डल कैसे दिए?
उत्तर: b
व्याख्या: उसने शल्य को मना किया और खुशी-खुशी (निकृत्य ददाति) अपने शरीर से काटकर कवच-कुण्डल दे दिए।
Q23. 'दानवीर' किसे कहा गया है?
उत्तर: b
व्याख्या: अपनी जान की परवाह न करते हुए कवच देने के कारण कर्ण को महान दानवीर कहा गया।
Q24. 'शक्र' किसका पर्यायवाची है?
उत्तर: c
व्याख्या: इन्द्र को शक्र भी कहा जाता है।
Q25. कर्ण ने घोड़ों (अश्व) के बाद क्या देने को कहा?
उत्तर: a
व्याख्या: गायों के बाद घोड़े (बाहिम), और फिर हाथियों का झुंड (वारण) देने को कहा।
Q26. "किम् इच्छसि? किम् ददामि?" (क्या चाहते हो? क्या दूँ?) - यह किसने पूछा?
उत्तर: b
व्याख्या: कर्ण ने भिक्षुक से पूछा कि आप क्या चाहते हैं।
Q27. कर्ण ने अन्त में क्या देकर इन्द्र को संतुष्ट किया?
उत्तर: c
व्याख्या: कवच और कुण्डल देने पर ही इन्द्र ने "ददातु" (दे दो) कहा।
Q28. धर्म की रक्षा किससे होती है?
उत्तर: b
व्याख्या: पाठ का संदेश है कि नश्वर शरीर नहीं, बल्कि धर्म, यश और दान ही शाश्वत हैं।
Q29. इन्द्र ने कर्ण से कवच-कुण्डल क्यों माँगा?
उत्तर: b
व्याख्या: अर्जुन की विजय सुनिश्चित करने के लिए (क्योंकि कवच रहते कर्ण अजेय था)।
Q30. 'कर्णभारम्' नाटक की कहानी कहाँ से ली गई है?
उत्तर: b
व्याख्या: यह महाभारत के युद्ध प्रसंग पर आधारित है।
Q31. 'नेच्छामि' का संधि विच्छेद है:
उत्तर: a
व्याख्या: न + इच्छामि (अ + इ = ए) - गुण संधि।
Q32. 'महत्तराम्' में प्रत्यय है:
उत्तर: c
व्याख्या: महत् + तरप् (तुलना में 'तर' शेष) + टाप् (स्त्रीलिंग) = महत्तरा।
Q33. 'गच्छतु' में लकार है:
उत्तर: b
व्याख्या: गम् धातु, लोट् लकार (आज्ञा), प्रथम पुरुष एकवचन = गच्छतु।
Q34. 'अंगराज' में समास है:
उत्तर: a
व्याख्या: अंगानां राजा (अंग देश का राजा) - षष्ठी तत्पुरुष।
Q35. 'भवतः' (आपका) में मूल शब्द है:
उत्तर: b
व्याख्या: मूल शब्द 'भवत्' है (षष्ठी एकवचन = भवतः)।
Q36. 'ददातु' (दें/दीजिए) में धातु है:
उत्तर: b
व्याख्या: मूल धातु 'दा' (देना) है।
Q37. 'भिक्षा' शब्द में लिंग है:
उत्तर: b
व्याख्या: भिक्षा (आकारांत) स्त्रीलिंग शब्द है।
Q38. 'निकृत्य' (काटकर) में प्रत्यय है:
उत्तर: b
व्याख्या: नि (उपसर्ग) + कृत् (काटना) + ल्यप् = निकृत्य।
Q39. 'सूर्य इव' में संधि है:
उत्तर: a
व्याख्या: सूर्यः + इव (विसर्ग का लोप हो जाता है) = सूर्य इव (विसर्ग संधि)।
Q40. 'सहस्रम्' (हजार) शब्द है:
उत्तर: a
व्याख्या: यहाँ 'गो' (गायों) की संख्या बता रहा है, अतः संख्यावाचक विशेषण है।
Q41. 'प्रीतः' (प्रसन्न) में प्रत्यय है:
उत्तर: a
व्याख्या: प्री + क्त = प्रीतः।
Q42. 'वारण' का अर्थ है:
उत्तर: b
व्याख्या: संस्कृत में वारण का अर्थ 'हाथी' होता है।
Q43. 'गृहाण' (ग्रहण करो/लो) किस पुरुष में है?
उत्तर: b
व्याख्या: यह मध्यम पुरुष एकवचन (लोट् लकार) का रूप है।
Q44. 'कर्णभारम्' में समास है:
उत्तर: a
व्याख्या: कर्णस्य भारः (कर्ण का भार/जिम्मेदारी) - षष्ठी तत्पुरुष।
Q45. 'याचे' (मांगता हूँ) किस पद में है?
उत्तर: b
व्याख्या: 'याच्' धातु आत्मनेपद में चलती है (याचते, याचेते, याचन्ते - याचे)।
Q46. 'शरीरे' में विभक्ति है:
उत्तर: a
व्याख्या: शरीर (अकारांत नपुंसक) सप्तमी एकवचन = शरीरे।
Q47. 'दातव्यम्' (देना चाहिए) में प्रत्यय है:
उत्तर: a
व्याख्या: दा + तव्यत् = दातव्यम्।
Q48. 'ब्राह्मणवेशधारी' में समास है:
उत्तर: a
व्याख्या: ब्राह्मणस्य वेशं धरति इति (उपपद तत्पुरुष) या कर्मधारय के अंतर्गत।
Q49. 'अस्मि' (हूँ) का बहुवचन रूप है:
उत्तर: c
व्याख्या: अस्मि (मैं हूँ) -> स्वः -> स्मः (हम सब हैं)।
Q50. 'धनम्' का विलोम नहीं है:
उत्तर: c
व्याख्या: 'वित्तम्' (Wealth) धन का पर्यायवाची है, विलोम नहीं।

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