कक्षा 10
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11.Sanskrit Chapter-11 MCQ Test

Sanskrit MCQ Test - 50 Marks | Ayush Study Point

Sanskrit MCQ Test Chapter-11

कक्षा 10 बिहार बोर्ड परीक्षा पर आधारित
Q1. 'व्याघ्रपथिककथा' पाठ के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: b
व्याख्या: यह पाठ नारायण पंडित द्वारा रचित 'हितोपदेश' से लिया गया है।
Q2. यह पाठ किस ग्रंथ से संकलित है?
उत्तर: b
व्याख्या: यह 'हितोपदेश' नामक नीतिग्रंथ से संकलित है।
Q3. 'हितोपदेश' के किस खण्ड से यह कथा ली गई है?
उत्तर: c
व्याख्या: व्याघ्रपथिककथा 'मित्रलाभ' खण्ड की प्रथम कथा है।
Q4. तालाब (सरस) के किनारे हाथ में कुश (दर्भ) लिए कौन बैठा था?
उत्तर: b
व्याख्या: तालाब के किनारे एक बूढ़ा बाघ (वृद्धः व्याघ्रः) हाथ में कुश लिए बैठा था।
Q5. बाघ के हाथ में क्या था?
उत्तर: c
व्याख्या: वह "भो भो पान्थाः! इदं सुवर्णकंकणम् गृह्यताम्" कह रहा था। उसके हाथ में सोने का कंगन था।
Q6. कौन लोभ में पड़ गया (आकृष्ट हुआ)?
उत्तर: b
व्याख्या: पथिक (पान्थ) सोने के कंगन को देखकर लोभ में पड़ गया (आलोचितं तेन)।
Q7. "भाग्येन एतत् सम्भवति" (भाग्य से ही ऐसा मिलता है) - यह किसने सोचा?
उत्तर: a
व्याख्या: पथिक ने सोचा कि ऐसा सुयोग भाग्य से ही प्राप्त होता है।
Q8. पथिक ने बाघ के बारे में क्या शंका की?
उत्तर: b
व्याख्या: उसने सोचा कि जहाँ प्राणों का खतरा हो (हिंसक जीव), वहाँ कार्य (प्रवृत्ति) नहीं करनी चाहिए।
Q9. "कुत्र तव कंकणम्?" (तेरा कंगन कहाँ है?) - यह किसने पूछा?
उत्तर: b
व्याख्या: लोभ के कारण रुककर पथिक ने बाघ से कंगन दिखाने को कहा।
Q10. बाघ ने खुद को कैसा बताया?
उत्तर: c
व्याख्या: उसने कहा कि मैं बूढ़ा हूँ, मेरे नाखून और दाँत गल चुके हैं, अब मैं दान-धर्म करता हूँ।
Q11. बाघ ने जवानी (यौवनदशा) में क्या पाप किए थे?
उत्तर: c
व्याख्या: "अनेकगोमानुषाणां वधार्म्मे..." - उसने स्वीकार किया कि जवानी में उसने अनेक गायों और मनुष्यों का वध किया था।
Q12. बाघ को दान देने का उपदेश किसने दिया था?
उत्तर: c
व्याख्या: उसने कहा कि किसी धार्मिक (धार्मिकेण) ने मुझे उपदेश दिया कि दान-धर्म आदि करो।
Q13. 'स्नात्शीलः दाता' (स्नान करके दान देने वाला) कौन बन गया था?
उत्तर: b
व्याख्या: बाघ ने नाटक किया कि वह अब पवित्र है, स्नानशील है और दानी है।
Q14. दुराचारी पर कौन विश्वास नहीं करता?
उत्तर: b
व्याख्या: हिंसक या दुराचारी जीवों पर विश्वास करना खतरे से खाली नहीं होता, ऐसा ज्ञानी मानते हैं, पर पथिक लोभ में फँस गया।
Q15. बाघ ने पथिक को कहाँ स्नान करने के लिए कहा?
उत्तर: c
व्याख्या: "तदत्र सरसि स्नात्वा..." - उसने तालाब में स्नान करके कंगन लेने को कहा।
Q16. पथिक किसमें फँस गया?
उत्तर: b
व्याख्या: स्नान के लिए उतरते ही वह गहरे कीचड़ (महापंके निमग्नः) में फँस गया।
Q17. "अहह महापंके पतितोऽसि" (अरे! तुम गहरे कीचड़ में गिर गए) - यह किसने कहा?
उत्तर: b
व्याख्या: बाघ ने हँसते हुए कहा कि मैं तुम्हें निकालता हूँ, तुम कीचड़ में फँस गए हो।
Q18. पथिक को किसने पकड़ लिया और खा गया?
उत्तर: b
व्याख्या: बाघ धीरे-धीरे उसके पास गया, उसे पकड़ा और खा गया (व्याघ्रेण धृत्वा स पान्थो चिन्तयत्... भक्षितः)।
Q19. क्रिया (ज्ञान) किसके बिना भार स्वरूप है?
उत्तर: b
व्याख्या: "ज्ञानं भारः क्रियां विना" - व्यवहार (अमल) में न लाया गया ज्ञान बोझ के समान है।
Q20. जिस प्रकार विधवा स्त्री का श्रृंगार व्यर्थ है, उसी प्रकार किसका ज्ञान व्यर्थ है?
उत्तर: b
व्याख्या: श्लोक में तुलना की गई है कि क्रिया (Action) के बिना ज्ञान वैसा ही व्यर्थ है जैसे विधवा का श्रृंगार।
Q21. 'हितोपदेश' कैसा ग्रंथ है?
उत्तर: b
व्याख्या: यह बालकों के लिए नीतिपरक शिक्षा देने वाला कथा ग्रंथ है।
Q22. पथिक किसके वश में होकर मारा गया?
उत्तर: b
व्याख्या: लोभ के कारण ही वह बाघ के जाल में फँसा।
Q23. दान किसे देना चाहिए (सात्विक दान)?
उत्तर: b
व्याख्या: "दातव्यमिति यद्दानं... अनुपकारिणे" - जो बदले में उपकार न कर सके, उसे, उचित देश, काल और पात्र को दिया गया दान सात्विक होता है।
Q24. बाघ ने पथिक को विश्वास दिलाने के लिए क्या सुनाया?
उत्तर: b
व्याख्या: उसने धर्मशास्त्रों के श्लोक सुनाकर पथिक को अपनी पवित्रता का विश्वास दिलाया।
Q25. "इन्द्रियाणि" (इन्द्रियों) को वश में करना किसके स्नान के समान है?
उत्तर: a
व्याख्या: पाठ में अवश-इन्द्रिय वाले (जिसका मन काबू में न हो) के कार्य को 'गजस्नान' (हाथी के नहाने जैसा - नहाकर फिर धूल डाल लेना) बताया गया है।
Q26. औषध (दवा) किसके लिए उपयोगी है?
उत्तर: b
व्याख्या: "आतुरस्य किम् औषधैः" (निरोग के लिए दवा व्यर्थ है), लेकिन रोगी के लिए दवा ही मित्र/उपयोगी है।
Q27. 'कंकणस्य लोभेन' (कंगन के लोभ से) कौन फँसा?
उत्तर: b
व्याख्या: पथिक कंगन के लोभ में फँस गया।
Q28. 'वश' में न रहने वाली इन्द्रियों और मन वालों की क्रिया कैसी होती है?
उत्तर: b
व्याख्या: जिनकी इन्द्रियाँ वश में नहीं, उनकी क्रिया हाथी के स्नान की तरह व्यर्थ होती है।
Q29. नारायण पंडित ने 'हितोपदेश' की रचना किस भाषा में की?
उत्तर: c
व्याख्या: हितोपदेश संस्कृत भाषा का नीतिग्रंथ है।
Q30. इस कथा से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: b
व्याख्या: लोभ का परिणाम विनाशकारी होता है, यही इस पाठ की मुख्य शिक्षा है।
Q31. 'व्याघ्रपथिककथा' में समास है:
उत्तर: b
व्याख्या: व्याघ्रस्य पथिकस्य च कथा (बाघ और पथिक की कथा) - इसमें 'व्याघ्रपथिक' में द्वन्द्व हो सकता है, लेकिन पूरी 'कथा' के साथ षष्ठी तत्पुरुष प्रधान है, या मध्यमपदलोपी। *सबसे सटीक:* (व्याघ्र और पथिक की) कथा - षष्ठी तत्पुरुष।
Q32. 'सरस्तीरे' (तालाब के किनारे) में समास है:
उत्तर: a
व्याख्या: सरसः तीरे (तालाब के किनारे) - षष्ठी तत्पुरुष।
Q33. 'आलोचितम्' (सोचा) में प्रत्यय है:
उत्तर: b
व्याख्या: आ + लोच् + क्त = आलोचितम्।
Q34. 'गृह्यताम्' (ग्रहण करो/लो) में लकार है:
उत्तर: b
व्याख्या: ग्रह् धातु (कर्मवाच्य/आत्मनेपद) लोट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन = गृह्यताम् (आज्ञा)।
Q35. 'गलितानखदन्तः' (जिसके नाखून-दाँत गल गए हों) में समास है:
उत्तर: c
व्याख्या: गलिताः नखाः दन्ताः च यस्य सः - बहुव्रीहि समास।
Q36. 'हस्ते' (हाथ में) में विभक्ति है:
उत्तर: a
व्याख्या: हस्त (अकारांत) सप्तमी एकवचन = हस्ते।
Q37. 'भाग्येनैतत्' का संधि विच्छेद है:
उत्तर: a
व्याख्या: भाग्येन + एतत् (अ + ए = ऐ) - वृद्धि संधि।
Q38. 'स्नात्वा' (नहाकर) में प्रत्यय है:
उत्तर: b
व्याख्या: स्ना + क्त्वा = स्नात्वा।
Q39. 'सुवर्णकंकणम्' (सोने का कंगन) में समास है:
उत्तर: b
व्याख्या: सुवर्णस्य कंकणम् (तत्पुरुष) या सुवर्णनिर्मितम् कंकणम् (मध्यमपदलोपी कर्मधारय)। सामान्यतः 'तत्पुरुष' सही है।
Q40. 'दारान्' (पत्नी को) में लिंग और वचन है:
उत्तर: a
व्याख्या: 'दारा' शब्द (पत्नी के अर्थ में) नित्य पुल्लिंग बहुवचन में प्रयुक्त होता है (दाराः, दारान्)।
Q41. 'गतः' (गया) में प्रत्यय है:
उत्तर: b
व्याख्या: गम् + क्त = गतः।
Q42. 'महापंके' (गहरे कीचड़ में) में विशेषण क्या है?
उत्तर: b
व्याख्या: 'महा' (महान/बड़ा) विशेषण है और 'पंक' विशेष्य है।
Q43. 'अहम्' का रूप है:
उत्तर: a
व्याख्या: 'अहम्' (मैं) अस्मद् शब्द का प्रथमा विभक्ति एकवचन रूप है।
Q44. 'श्रद्धत्ते' (विश्वास करता है) में धातु है:
उत्तर: b
व्याख्या: श्रत् + धा (धातु) + आत्मनेपद = श्रद्धत्ते।
Q45. 'प्रसार्य' (फैलाकर) में प्रत्यय है:
उत्तर: b
व्याख्या: प्र + सृ + ल्यप् = प्रसार्य।
Q46. 'दुराचारी' का विलोम है:
उत्तर: b
व्याख्या: दुराचारी (बुरा आचरण) का विलोम सदाचारी (अच्छा आचरण)।
Q47. 'कुत्र' (कहाँ) क्या है?
उत्तर: c
व्याख्या: कुत्र एक अव्यय (Indecclinable) शब्द है।
Q48. 'व्याघ्रेण' में कारक है:
उत्तर: c
व्याख्या: व्याघ्र (अकारांत) तृतीया एकवचन = व्याघ्रेण (बाघ के द्वारा)।
Q49. 'पुत्रदाराः' (पुत्र और पत्नी) में समास है:
उत्तर: b
व्याख्या: पुत्राः च दाराः च (द्वन्द्व समास)।
Q50. 'अहह' (अरे!) क्या सूचित करता है?
उत्तर: b
व्याख्या: 'अहह' एक अव्यय है जो आश्चर्य या खेद (जैसे - अरे! कीचड़ में गिर गए) प्रकट करता है।

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