11.लौटकर आऊँगा फिर Notes
काव्य खंड - अध्याय 11: लौटकर आऊँगा फिर
गोधूलि भाग-2 (कविता - जीवनानंद दास)
पाठ परिचय: प्रस्तुत कविता 'लौटकर आऊँगा फिर' बंगाल के प्रसिद्ध कवि जीवनानंद दास द्वारा रचित है। इसमें कवि का अपनी मातृभूमि 'बंगाल' के प्रति गहरा प्रेम और अगले जन्म में फिर से वहीं लौटने की उत्कट इच्छा (Strong Desire) व्यक्त की गई है। इस कविता का हिंदी अनुवाद प्रयाग शुक्ल ने किया है।
1. कवि परिचय: जीवनानंद दास
परिचय: जीवनानंद दास (1899-1954) बांग्ला साहित्य के एक प्रमुख कवि थे। उन्हें रवींद्रनाथ टैगोर के बाद बांग्ला का सबसे बड़ा कवि माना जाता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- उपनाम: उन्हें 'रूपसी बांग्ला' का कवि कहा जाता है क्योंकि उन्होंने बंगाल की सुंदरता का बहुत ही प्यारा चित्रण किया है।
- प्रमुख रचनाएँ: 'झरा पालक', 'धूसर पांडुलिपि', 'बनलता सेन', 'रूपसी बांग्ला'।
- निधन: एक दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी।
2. पुनर्जन्म की इच्छा: पक्षियों के रूप में
कवि कहते हैं कि मरने के बाद वे फिर से बंगाल में ही लौटना चाहते हैं, चाहे इंसान बनकर न सही, किसी पक्षी के रूप में ही सही।
संभावित रूप:
- अबाबील (Ababil): कवि 'अबाबील' पक्षी बनकर लौटना चाहते हैं।
- कौआ (Crow): वे भोर (सुबह) में कटहल के पेड़ की छांव में 'कौआ' बनकर काँव-काँव करना चाहते हैं।
- हंस (Swan): वे किसी किशोरी का पाला हुआ 'हंस' बनना चाहते हैं, जो दिन भर पानी में तैरता रहे और जिसके पैरों में घुंघरू बँधे हों।
- उल्लू (Owl): वे कपास के पेड़ पर बैठकर बोलने वाला 'उल्लू' बनने को भी तैयार हैं।
3. बंगाल का सौंदर्य और नदियाँ
कवि को बंगाल के धान के खेत और बहती नदियाँ बहुत प्रिय हैं।
- धान के खेत: कवि "धान के खेत वाले बंगाल" में लौटने की बात करते हैं।
- नदियाँ: वे कहते हैं कि जहाँ "नदी धोती ही रहती है पानी से किनारे को", मैं वहाँ आऊँगा।
- गंदला पानी: हंस बनकर वे दिन भर हरी घास की गंध वाले पानी में तैरना चाहते हैं।
4. अदृश्य उपस्थिति
कविता के अंत में कवि एक रहस्यमयी माहौल बनाते हैं।
सारस का झुंड:
कवि कहते हैं कि शाम के समय जब रंगीन बादलों के बीच सारस (Cranes) पक्षियों का झुंड अपने घोंसलों की ओर लौट रहा होगा, तो ध्यान से देखना—
"उन्हीं के बीच मैं होऊँगा, देखोगे।"
अर्थात, कवि को विश्वास है कि वे किसी न किसी रूप में बंगाल की प्रकृति में हमेशा मौजूद रहेंगे।
"उन्हीं के बीच मैं होऊँगा, देखोगे।"
अर्थात, कवि को विश्वास है कि वे किसी न किसी रूप में बंगाल की प्रकृति में हमेशा मौजूद रहेंगे।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- अनुवादक: इस कविता का हिंदी अनुवाद 'प्रयाग शुक्ल' ने किया है।
- रूपसी बांग्ला: यह कविता उनके प्रसिद्ध संग्रह 'रूपसी बांग्ला' से है।
- किशोर: हंस बनने की कल्पना में 'किशोरी' का जिक्र है, शायद उसके पैरों में घुंघरू हों।
- प्रेम: यह कविता देश-प्रेम (Patriotism) का अनूठा उदाहरण है।
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