1.राम बिनु बिरथे जगि जनम Notes
काव्य खंड - अध्याय 1: राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा
गोधूलि भाग-2 (पद - गुरु नानक)
पाठ परिचय: इस पाठ में सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी के दो पद संकलित हैं। पहले पद में उन्होंने 'राम नाम' के बिना जीवन को व्यर्थ बताया है और दूसरे पद में 'सुख-दुख में एक समान' रहने का उपदेश दिया है।
1. कवि परिचय: गुरु नानक
परिचय: गुरु नानक का जन्म 1469 ई. में तलवंडी ग्राम (जिला लाहौर) में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका जन्म स्थान 'ननकाना साहब' कहलाता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- भक्ति धारा: वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि थे।
- रचनाएँ: 'जपुजी', 'आसादीवार', 'रहिरास' और 'सोहिला'। इनकी रचनाओं का संग्रह सिखों के 5वें गुरु अर्जुन देव ने 1604 ई. में 'गुरु ग्रंथ साहिब' नाम से किया।
- निधन: 1539 ई. में उन्होंने "वाहगुरु" कहते हुए अपने प्राण त्याग दिए।
2. प्रथम पद: राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा
मुख्य भाव: इस पद में गुरु नानक कहते हैं कि भगवान के नाम (राम नाम) के बिना इस संसार में जन्म लेना बेकार (व्यर्थ) है।
व्याख्या:
- भोजन और बोली: राम नाम के बिना भोजन करना 'विष' (जहर) खाने के समान है और बोलना 'विष' बोलने के समान है।
- बाहरी दिखावा: पुस्तक पढ़ना, व्याकरण का ज्ञान, संध्या-वंदन, जटा बढ़ाना, भस्म लगाना या तीर्थ यात्रा करना—ये सब व्यर्थ हैं यदि मन में राम का नाम नहीं है।
- मुक्ति: गुरु के उपदेश (शब्द) के बिना मुक्ति नहीं मिल सकती।
3. द्वितीय पद: जो नर दुख में दुख नहिं मानै
मुख्य भाव: इस पद में ऐसे व्यक्ति (सच्चे साधक) के लक्षण बताए गए हैं जो सुख और दुख में एक समान रहता है।
सच्चे संत के लक्षण:
- उदासीनता: जिसे दुख से दुख नहीं होता और सुख, स्नेह (प्रेम) और भय (डर) का कोई असर नहीं होता।
- सोना और मिट्टी: जो दूसरे के सोने (धन) को मिट्टी के समान समझता है।
- निंदा-स्तुति: जो अपनी बुराई (निंदा) या तारीफ (स्तुति) सुनकर विचलित नहीं होता।
- ब्रह्म का निवास: ऐसे ही निर्मल हृदय वाले व्यक्ति के अंदर ब्रह्म (ईश्वर) का निवास होता है।
4. पानी संग पानी
पद के अंत में गुरु नानक अपनी स्थिति का वर्णन करते हुए कहते हैं:
"नानक लीन भयो गोबिंद सों, ज्यों पानी संग पानी।"
अर्थ: जिस प्रकार पानी में पानी मिलकर एकाकार (एक) हो जाता है, उसी प्रकार मेरी आत्मा परमात्मा (गोविंद) में लीन हो गई है।
अर्थ: जिस प्रकार पानी में पानी मिलकर एकाकार (एक) हो जाता है, उसी प्रकार मेरी आत्मा परमात्मा (गोविंद) में लीन हो गई है।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- शांति: हरि (ईश्वर) का कीर्तन करने से ही सच्ची शांति मिलती है।
- ब्रह्म का निवास: काम और क्रोध (Kam-Krodh) से मुक्त हृदय में।
- भाषा: गुरु नानक की भाषा में पंजाबी के साथ ब्रजभाषा और खड़ी बोली का मिश्रण है।
- शिखा/सूत: जनेऊ और शिखा (चोटी) बाहरी दिखावे के प्रतीक हैं, जिनका कवि ने विरोध किया है।
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