10.अक्षर-ज्ञान Notes
काव्य खंड - अध्याय 10: अक्षर-ज्ञान
गोधूलि भाग-2 (कविता - अनामिका)
पाठ परिचय: प्रस्तुत कविता 'अक्षर-ज्ञान' समकालीन कवयित्री अनामिका की चर्चित श्रृंखला 'कवि ने कहा' से संकलित है। इसमें बच्चों के अक्षर सीखने की शुरुआती प्रक्रिया का बड़ा ही मनोवैज्ञानिक और रोचक वर्णन किया गया है।
1. कवयित्री परिचय: अनामिका
परिचय: अनामिका का जन्म 17 अगस्त 1961 को मुजफ्फरपुर (बिहार) में हुआ था। उनके पिता श्यामनंदन किशोर भी एक प्रसिद्ध हिंदी गीतकार थे।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- शिक्षा: उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. और पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की।
- पेशा: वे सत्यवती कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) में अंग्रेजी की प्राध्यापिका (Professor) हैं।
- रचनाएँ: 'गलत पते की चिट्ठी', 'बीजाक्षर', 'अनुष्टुप'।
- सम्मान: राष्ट्रभाषा परिषद पुरस्कार, भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार।
2. 'क', 'ख', 'ग', 'घ' का संघर्ष
कविता में एक छोटे बच्चे के अक्षर सीखने की कठिनाइयों का वर्णन है:
- 'क' (कबूतर): बच्चा जब 'क' लिखता है, तो वह चौखटे (Line) में नहीं अँटता। जैसे कबूतर फुदकता है, वैसे ही उसका 'क' पंक्ति से नीचे उतर जाता है।
- 'ख' (खरगोश): 'ख' लिखते समय उसे लगता है जैसे वह खरगोश की खालिस बेचैनी हो।
- 'ग' (गमला): उसका 'ग' गमले जैसा टूटता हुआ सा बनता है।
- 'घ' (घड़ा): 'घ' लिखते समय उसे लगता है जैसे घड़ा लुढ़क गया हो।
3. 'ङ' (अँगा) और माँ-बेटा
माँ की गोद: बच्चे को 'ङ' (अँगा) लिखना सबसे कठिन लगता है।
- उसे लगता है कि 'ङ' का 'ड' माँ है और उसके बगल का बिंदु (नुक्ता) उसकी गोद में बैठा हुआ बेटा है।
- माँ-बेटे (ङ और बिंदु) को एक साथ साधने (लिखने) की कोशिश में उससे यह अक्षर सधता नहीं है।
- असफलता के कारण उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं।
4. विफलता ही सृजन है
कवयित्री कहती हैं कि बच्चे की आँखों में आए ये 'पहली विफलता के आँसू' ही ज्ञान की शुरुआत हैं।
सृष्टि का विकास:
जब हम कोशिश करते हैं और असफल होते हैं, तभी हमारे अंदर सीखने की सच्ची प्यास जागती है। ये आँसू ही 'सृष्टि के विकास कथा के प्रथमाक्षर' (First letters of creation) हैं। अर्थात, असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- चौखटे: 'क' चौखटे में नहीं अँटता।
- बेचैनी: 'ख' को खरगोश की बेचैनी जैसा बताया गया है।
- अनवरत कोशिश: बच्चे की कोशिश लगातार (अनवरत) जारी रहती है।
- संबोधन: कवयित्री ने 'ङ' को माँ-बेटा के प्रतीक के रूप में दिखाया है।
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