10.मछली Notes
अध्याय 10: मछली
गोधूलि भाग-2 (कहानी - विनोद कुमार शुक्ल)
1. लेखक परिचय: विनोद कुमार शुक्ल
परिचय: विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) में हुआ था। वे समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि और कथाकार हैं।
- कविता संग्रह: 'वह आदमी नया गरम कोट पहनकर चला गया विचार की तरह', 'सब कुछ होना बचा रहेगा'।
- उपन्यास: 'नौकर की कमीज' (इस पर फिल्म भी बनी है), 'खिलेगा तो देखेंगे', 'दीवार में एक खिड़की रहती थी'।
- सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (1999), रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार।
2. बाजार से घर तक का सफर
लेखक और उसका छोटा भाई संतु बाजार से तीन मछलियाँ खरीदते हैं। उनमें से एक मछली मर चुकी थी, लेकिन दो मछलियाँ जिंदा थीं।
3. संतू की इच्छा और दीदी का दुख
(क) संतू क्या चाहता था?
संतु चाहता था कि वह एक मछली को कुएँ में डाल दे। वह उसे पालना चाहता था और जब मन करता, बाल्टी डालकर उसे निकालकर खेलता।
(ख) दीदी क्यों रो रही थी?
घर में मछली बनने की तैयारी हो रही थी, जिससे दीदी बहुत दुखी थीं। वह कमरे में बंद होकर सिसक-सिसक कर रो रही थी। उसे मछलियों का काटा जाना पसंद नहीं था।
4. भग्गू और मछली का अंत
भग्गू: घर का नौकर जो मछली काटने का काम करता था।
- संतु ने एक जिंदा मछली को कुएँ में डालने के लिए उठा लिया और लेकर भाग गया।
- भग्गू उसके पीछे "अरे अरे" करता हुआ दौड़ा और मछली छीन ली।
- अंत में, भग्गू ने मछलियों को पत्थर (पाटा) पर पटककर मार डाला। संतू और लेखक मायूस होकर खड़े रहे।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- परछाई: लेखक कहते हैं कि मरी हुई मछली की आँखों में अपनी परछाई (चेहरा) नहीं दिखती।
- झोला: लेखक मछलियों को झोले में लेकर आया था।
- संतु: ठंड से कांप रहा था क्योंकि वह बारिश में भीग गया था।
- संदेश: कहानी बच्चों की कोमल भावनाओं और बड़ों की कठोर दुनिया के बीच के अंतर को दिखाती है।
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