1.श्रम विभाजन और जाति प्रथा Notes
अध्याय 1: श्रम विभाजन और जाति प्रथा
गोधूलि भाग-2
1. लेखक परिचय: भीमराव आंबेडकर
जीवन परिचय: बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू (मध्य प्रदेश) के एक दलित परिवार में हुआ था। उन्होंने जीवन भर सामाजिक अन्याय और छुआछूत के विरुद्ध संघर्ष किया।
- शिक्षा: उच्च शिक्षा के लिए बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर वे न्यूयॉर्क (अमेरिका) और फिर लंदन गए।
- योगदान: वे भारतीय संविधान के निर्माता और मानवाधिकारों के प्रबल समर्थक थे।
- निधन: उनका निधन दिसंबर 1956 में दिल्ली में हुआ।
- प्रमुख रचनाएँ: 'द कास्ट्स इन इंडिया', 'जेनेसिस एंड डेवलपमेंट', 'बुद्धा एंड हिज धम्मा'।
2. श्रम विभाजन बनाम जाति प्रथा
लेखक ने भारतीय समाज में व्याप्त जाति प्रथा की तुलना आधुनिक सभ्य समाज के श्रम विभाजन से की है:
(क) श्रम विभाजन (Division of Labour)
अर्थ: आधुनिक सभ्य समाज कार्य कुशलता (Efficiency) के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है।
- यह कार्य की प्रकृति पर आधारित होता है।
- इसमें व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार काम करता है।
- यह समाज की आवश्यकता है।
(ख) जाति प्रथा (Caste System)
दोष: भारत की जाति प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ "श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन" भी करती है।
- यह मनुष्य की रुचि या क्षमता पर आधारित नहीं है।
- यह गर्भधारण के समय (जन्म से) ही पेशा तय कर देती है।
- यह ऊँच-नीच का भेदभाव पैदा करती है।
3. जाति प्रथा के प्रमुख दोष
बेरोजगारी का प्रमुख कारण: हिंदू धर्म की जाति प्रथा किसी भी व्यक्ति को ऐसा पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती जो उसका पैतृक पेशा न हो। जब तकनीक या उद्योग बदलते हैं, तो व्यक्ति को अपना काम बदलने की जरूरत होती है, लेकिन जाति प्रथा उसे रोकती है। इसी कारण भारत में बेरोजगारी और भुखमरी की समस्या बनी हुई है।
कार्यकुशलता में कमी: इसमें व्यक्ति को अरुचि और विवशता के साथ काम करना पड़ता है। जब काम में मन नहीं लगता, तो व्यक्ति 'टालू' काम करता है और अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाता।
4. आदर्श समाज की परिकल्पना
अंबेडकर जी के अनुसार, एक आदर्श समाज वह है जिसमें गतिशीलता हो और जो तीन मुख्य तत्वों पर आधारित हो:
- स्वतंत्रता (Liberty): जीवन, शारीरिक सुरक्षा और पेशा चुनने की आजादी।
- समता (Equality): सभी व्यक्तियों को विकास के समान अवसर मिलने चाहिए।
- भ्रातृत्व (Fraternity): समाज में भाईचारा 'दूध और पानी' के मिश्रण जैसा होना चाहिए। लेखक के अनुसार, लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं, बल्कि सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति है।
परीक्षा सारांश (Exam Highlights)
- लेखक: भीमराव आंबेडकर (जन्म: 14 अप्रैल 1891)।
- मूल पाठ: 'एनिहिलेशन ऑफ कास्ट' (भाषण)।
- मुख्य विचार: जाति प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन करती है।
- निष्कर्ष: सच्चा लोकतंत्र स्वतंत्रता, समता और भाईचारे पर आधारित है।
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